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गाजीपुर से बक्सर तक गंगा के दोनों किनारे तैरती लाशें, महात्रासदी की असली तस्वीर

गाजीपुर का गहमर इलाका वहीं है जहां सबसे पहले गंगा में तैरती हुई लाशें देखी गई थीं. बुधवार को भी सिलसिला जारी रहा और आजतक की टीम ने वह भयानक मंजर अपनी आंखों से देखा.

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गाजीपुर से बक्सर तक गंगा के दोनों किनारे तैरती लाशें
गाजीपुर से बक्सर तक गंगा के दोनों किनारे तैरती लाशें
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तैरती लाशों के चलते इलाके में खौफ का माहौल
  • गहमर घाट पर तीन लाशों की प्रशासन द्वारा अंत्येष्टि
  • महात्रासदी की असली तस्वीर आई सामने

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य पहले ही कोरोना वायरस की महामारी से बेहाल हैं. ऊपर से नदियों में तैरती लाशों ने माहौल को और डरावना बना दिया है. जो गंगा जीवन दान देती है, उस गंगा की धारा में अनगिनत लाशों को प्रवाहित किया जा रहा है. चाहे उत्तर प्रदेश का गाजीपुर हो या बिहार का बक्सर, पिछले तीन-चार दिनों से तैरती लाशों के चलते इलाके में खौफ का माहौल है. 

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गाजीपुर में दिखा महात्रासदी का मंजर

गाजीपुर का गहमर इलाका वहीं है जहां सबसे पहले गंगा में तैरती हुई लाशें देखी गई थीं. बुधवार को भी सिलसिला जारी रहा और आजतक की टीम ने वह भयानक मंजर अपनी आंखों से देखा. गहमर घाट पर गुरुवार को भी तीन लाशें बरामद की गईं जिनकी प्रशासन द्वारा अंत्येष्टि कर दी गई. गाजीपुर में जो हालात हैं उन्हें देखकर स्थानीय लोगों में भी दहशत का माहौल है. एक तो बीमारी के संक्रमण का डर ऊपर से पानी पर तैरती लाशें किसी डरावने सपने से कम नहीं है. गहमर के रहने वाले घनश्याम चौधरी कहते हैं, "पिछले दो-तीन दिनों से लाशें यहां पर आने लगी हैं. डर के मारे लोग गंगा में स्नान करने भी नहीं जा रहे हैं. प्रशासन के लोगों ने कुछ लाशों को नदी के दूसरी तरफ दफना दिया तो कुछ को चूना डालकर डीकंपोज कर दिया." 

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लाशें अनगिनत, प्रशासन की बढ़ी मुसीबत

गहमर घाट पर मंगलवार की दोपहर भी 3 लाशें तैरती हुई प्रशासन को मिलीं. लाशों को निकलवाने के बाद उनकी अंत्येष्टि कर दी गई. पानी में फूली हुई लाशों को जलाया नहीं जा सकता इसलिए उन्हें दफना दिया गया. इलाके के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर अरुण वर्मा कहते हैं, "आज भी तीन शव बरामद हुए हैं. उनकी अंत्येष्टि की जा रही है और साथ-साथ हम इलाके के लोगों को मुनादी करते हुए अपील कर रहे हैं कि लोग शवों को गंगा में ना बहाएं. जिनके पास लकड़ियों की व्यवस्था नहीं है हम उन्हें कह रहे हैं कि प्रशासन मदद करेगा. लेकिन शवों की संख्या अनगिनत है, ऐसे में यह पहचानना भी मुश्किल है कि शव महिला के हैं या पुरुष के, कहीं एक साथ दो शव पड़े हैं तो कहीं 3. इतनी मौतें कागजों पर क्यों दिखाई नहीं पड़ रहीं, ये सवाल सिस्टम से जरूर पूछा जाएगा.

बीजेपी विधायक ने क्या तर्क दिया?

स्थानीय निवासी जितेंद्र कहते हैं अब तो यह संख्या फिर भी कम हुई है लेकिन 4 दिन पहले स्थिति इससे भी बदतर थी. जितेंद्र के मुताबिक रात का फायदा उठाकर जिले के सुदूर गांव में कई लोगों ने अंत्येष्टि के बिना ही लोगों के शव गंगा में प्रवाहित कर दिए. इसके चलते अब न तो गंगा के पानी का आचमन किया जा सकता है ना ही स्नान किया जा सकता है.

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जब इस घटना ने ज्यादा तूल पकड़ा तो बीजेपी की विधायक सुनीता सिंह ने भी इलाके का दौरा किया. विधायक ने कहा है, "ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है, यह नेचुरल है. लाशें वहां से बहकर आई हैं और यहां लग गई हैं. प्रयागराज से भी लोग लाशें छोड़ दे रहे हैं. हवा का रुख जहां जाता है लाशें चली जाती हैं. बिहार के लोग भी आकर हमारे यहां का संस्कार करते हैं. 

गहमर, पंचमुखी घाट को पार करने के बाद आजतक की टीम गंगा मां के साथ बिहार की सीमा में प्रवेश कर गई. बाएं हाथ की तरफ कर्मनाशा नदी की पतली धरा गंगा में समावेशित होती है तो दाएं हाथ की तरफ गंगा के दूसरे किनारे पर तैरती लाशें दिखाई देती हैं. यहां से बिहार के बक्सर जिले की सीमा शुरू होती है. लेकिन पानी पर तैरती लाशें सीमाएं नहीं देख रहीं. महामारी ने सभी सीमाओं को तोड़ दिया है. वैसे इन घटनाओं को देखते हुए NHRC की तरफ से केंद्र,यूपी और बिहार सरकार को नोटिस जारी कर दिया गया है.
 

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