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लखनऊ: अलकायदा टेरर प्लान पर बड़ा खुलासा, DIY मॉड्यूल में पाकिस्तान से दी जा रही थी ट्रेनिंग

DIY यानी Do It Yourself खुद करो, का यह मॉड्यूल बीते एक दशक से आतंकी संगठनों को खूब भाया है. लखनऊ के दुबग्गा व मड़ियांव इलाके से पकड़े गए अलकायदा के दोनों संदिग्ध भी इसी मॉड्यूल का हिस्सा थे. इस मॉड्यूल के जरिए आतंकी संगठन इंटरनेट के जरिए आतंक का ककहरा सिखाते हैं.

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पाकिस्तान से मिल रही थी ट्रेनिंग (फाइल फोटो)
पाकिस्तान से मिल रही थी ट्रेनिंग (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दोनों संदिग्ध आतंकी डीआईवाई मॉड्यूल का हिस्सा थे
  • पाकिस्तान से इंटरनेट पर दी जा रही थी ट्रेनिंग

लखनऊ से यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े अलकायदा से जुड़े दोनों संदिग्ध आतंकी डीआईवाई मॉड्यूल का हिस्सा थे. आतंकी संगठनों के द्वारा बीते एक दशक से अपनाया जा रहा यह मॉड्यूल ऐसा है, जिसमें आतंक की राह पर चलने वाले शख्स को उसके घर में ही इंटरनेट के जरिए ट्रेंड किया जाता था और फिर कुछ कर गुजरने के लिए उकसाया जाता था. बीते एक दशक से उत्तर प्रदेश व देश में हुईं तमाम आतंकी घटनाओं में आईएसआई से लेकर अलकायदा व आईएसआईएस ने इसी डीआईवाई मॉड्यूल का इस्तेमाल किया है.

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DIY यानी Do It Yourself खुद करो, का यह मॉड्यूल बीते एक दशक से आतंकी संगठनों को खूब भाया है. लखनऊ के दुबग्गा व मड़ियांव इलाके से पकड़े गए अलकायदा के दोनों संदिग्ध भी इसी मॉड्यूल का हिस्सा थे. इस मॉड्यूल के जरिए आतंकी संगठन इंटरनेट के जरिए आतंक का ककहरा सिखाते हैं. जो मजहब के नाम पर आतंक फैलाने दहशतगर्दी करने को तैयार होते हैं. मुंबई हमले में पकड़ा गया कसाब और मारे गए उसके साथी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के लिए किरकिरी का सबब बने. 

यही वजह थी कि मुंबई हमले के बाद आतंकी संगठनों ने डीआईवाई मॉड्यूल का इस्तेमाल किया. अब आतंकी संगठन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश बिहार या अन्य राज्यों से ट्रेनिंग देने के लिए युवकों को अपने कैंप में सीधे नहीं बुलाते हैं. इंटरनेट के जरिए पहले इनसे कहा जाता है कि खुद कुछ करो. तब ट्रेनिंग लेने कैम्प में आना.

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और पढ़ें- यूपी: कूकर बम बनाने में एक्सपर्ट्स हैं संदिग्ध आतंकी, ATS को मिली 14 दिनों की रिमांड

पकड़े गए मिनहाज और मसीरुद्दीन, इसी मॉड्यूल के जरिए उत्तर प्रदेश में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए प्रेशर कूकर बना रहा था. इंटरनेट के इस दौर में पाकिस्तान में बैठा अलकायदा का अंसार गजवातुल हिन्द का हैंडलर उमर हलमंडी इसी मॉड्यूल के तहत मिनहाज और मसीरुद्दीन को बड़ा आतंकी हमला करने की प्लानिंग समझा रहा था.

एटीएस के अधिकारियों की मानें तो इस मॉड्यूल के जरिए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस आरोप से बचने की कोशिश कर लेता है. भारत में हुई किसी भी आतंकी घटना में उसका हाथ है. क्योंकि आतंकी घटना में पकड़ा गया आरोपी हिंदुस्तानी होता है. हिंदुस्तान का ही रहने वाला होता है. शुरुआत में आईएसआई, हूजी, सिमी लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने भारत में रहने वाले युवाओं को बरगलाया. अपने ट्रेनिंग कैंप में आतंकी हमले की ट्रेनिंग दी. लेकिन जब वह किसी आतंकी वारदात में पकड़े गए तो उनके पास से पाकिस्तान और आतंकी कनेक्शन के सबूत मिल गए.

 
वहीं दूसरी तरफ किसी पाकिस्तानी को आतंकवादी बनाकर भेजने और फिर पकड़े जाने पर वारदात में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत सामने आ रहे थे. ऐसे में आतंकी वारदात में पकड़े जाने पर सच सामने आने का डर बड़ा था. लेकिन डीआईवाई मॉड्यूल में ऐसा कोई खतरा ना तो आईएसआई और आतंकी संगठन को नहीं रह जाता. यही वजह है कि बीते एक दशक से मिनहाज और मसीरुद्दीन जैसे तमाम युवाओं को सीमा पार से बरगला कर आतंक की राह पर चलाया जा रहा है.

अलकायदा के दोनों संदिग्धों से अब तक की पूछताछ में एटीएस चीफ प्रशांत कुमार ने भी माना कि दोनों कभी देश के बाहर नहीं गए और इंटरनेट के जरिए पाकिस्तान में बैठा हैंडलर इनको निर्देश दे रहा था. इनको कूकर बम बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी.

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