Flood in Varanasi: वाराणसी में गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है. वह खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. प्रति घंटे 4 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ती जा रही गंगा चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर को पार कर चुकी है और अब 71.26 मीटर यानी खतरे के निशान की ओर बढ़ चली है.
इसके चलते गंगा की सहायक नदी वरुणा भी उफान पर है. वरुणा किनारे बसे दर्जनों मोहल्लों के हजारों घरों में रहने वाले लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. यह मोहल्ले वाराणसी के निचले इलाके में आते हैं. यहां हर साल बाढ़ यूं ही लोगों के लिए मुसिबत बनकर आती है.
वहीं जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है. स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है, जिसको देखते हुए 40 मेडिकल टीम का गठन हो चुका है. बाढ़ राहत शिविरों में 11 टीमें सक्रिय हैं.
बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को निकालने के लिए शास्त्री घाट से केंद्र बनाकर एलएवन NDRF चौबीसों घंटे राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है. पहले से ज्यादा नाव और लाइफ जैकेट्स के साथ पूरे समय NDRF के जवाब बाढ़ ग्रस्त इलाके में प्रभावित लोगों तक पहुंचकर उनकी मदद कर रहें हैं.
गलियों में करने पड़ रहे रहे अंतिम संस्कार
गंगा के सभी 84 घाट और सीढ़ियां पहले ही पानी में डूब चुके थे. इस वजह से डूब चुके सभी 84 गंगा घाटों में श्मशान घाट हरिश्चंद्र भी है, जिसकी वजह से शवों का अंतिम संस्कार घाट से लगने वाली गलियों में किया जा रहा है. इतना ही नहीं, गलियों में शवदाह के चलते इलाके के लोग या तो धीरे-धीरे पलायन कर रहे हैं या फिर शवदाह के धुएं, राख और ताप के चलते अपनी खिड़कियों को चुनवाना शुरू कर दिया है.
कोई जरूरत हो, मुझे बता सकते हैं: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थानीय अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली. पीएम ने अधिकारियों को लोगों की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए. पीएम ने अफसरों से कहा कि किसी भी विशेष सहायता की जरूरत महसूस हो तो उन्हें सीधे अवगत कराएं. मंडलायुक्त ने पीएम को लगातार बढ़ते नदियों के जल स्तर से, राहत शिविरों की व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी दी.