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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में यमुना, बेतवा और केन नदियों सहित तमाम नदियों में आई भीषण बाढ़ और भारी बारिश से खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है. इससे किसानों को 15 अरब रुपयों का नुकसान हुआ है और सूखे की मार से बेहाल रहने वाला बुंदेलखंड अब पानी-पानी हो गया है. लाखों हेक्टेयर की तिलहन फसलें बाढ़ और बारिश के चलते तबाह हो गई हैं. खेतों में कई फुट जल भराव से फसल खड़े-खड़े ही सड़ गई है. ऐसे में किसान एक बार फिर भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है.
गौरतलब है कि इस बार सिर्फ हमीरपुर जिले में खरीफ की बुआई 1.9 लाख हेक्टेयर में हुई थी. तिलहन फसलों में मूंग, अरहर, मसूर जैसी फसलें और तिलहनी फसलों में तीली, मूंगफली जैसी फसलें बहुतायत में बोई गई थीं. तीली के तो कटने का समय भी आ गया लेकिन फिर कुदरत रूठ गई और सारी की सारी फसल खेत में ही सड़ गई. अभी तक 70% से अधिक फसल नष्ट हो चुकी है.
बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में तिली की फसल पूरी तरह तैयार थी, बालियां भी पेड़ों से झांक रही थीं लेकिन बारिश के बाद उनके दाने ही मर गए. यही हाल बाजरा, जुंडी, अरहर, मसूर और मूंग का भी हुआ जो खेतों से घर न आ सकी. जो फसल बची है उनमें कुछ पैदा होने की उम्मीद नहीं है. ऐसे में मजबूरन अब किसान इन फसलों को जानवरों को खिलाकर उनका पेट भर रहा है.
इस इलाके के किसान राम बालक राम ने बताया कि उनके पास कुछ नहीं बचा है. सारी फसल बर्बाद हो गई है और घर में रखा अनाज और भूसा भी बाढ़ के पानी मे डूबकर सड़ गया है, जिसके चलते इंसान और जानवरों के सामने भूंखे मरने की नौबत आ गई है. यह हालात सिर्फ हमीरपुर जिले का ही नहीं है बल्कि बुंदेलखंड के सभी 7 जिलों (महोबा, बांदा, चित्रकूट, जालौन, झांसी, ललितपुर और हमीरपुर) का है.
हमीरपुर जिले में यमुना और बेतवा नदी में बाढ़ और बारिश ने ऐसी तबाही मचाई कि अन्नदाता खुद दाने-दाने को मोहताज हो गया. इस बाढ़ और बारिश की चपेट में आकर सैकड़ों मकान जमींदोज हो गए. 1000 से अधिक गांवों की फसल बबार्द हो गई. अब जिले के कृषि अधिकारी भी मान रहे हैं कि तिलहनी फसलों को खासा नुकसान हुआ है जिसका सर्वे करवाया जा रहा है.
हमीरपुर जिले के कृषि उप निदेशक, डॉ सरस तिवारी ने बताया कि खरीफ की पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो गई है. फसल बर्बादी के लिए टीम गठित कर सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे की रिपोर्ट के बाद फसल बीमा और मुआवजा दिया जाएगा.
कुदरत के कहर से बर्बाद हुए किसानों को अब खाने के लाले पड़ गए हैं. बाढ़ और बारिश का कहर घर-गृहस्थी और खेत सब खा गया. वहीं, लगातार हो रही बारिश ने हालात और खराब कर दिए हैं. लोगों अपने घरों से दूर खुले में पॉलीथिन का टेंट लगाकर परिवार सहित रहने को मजबूर हैं. ऐसे में यहां के किसानों की जिंदगी बद से बदतर हो गई है. ऊपर से फसलों के खोने का गम किसानों को कर्ज के बोझ तले दबकर जीने को मजबूर कर रहा है.
हमीरपुर जिले के किसान नेता संतोष सिंह ने बताया कि हमीरपुर जिले में बाढ़ और बारिश से करीब 200 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है. बुंदेलखंड के खेतों में खड़ी,सूखी और बेजान हो चुकी फसलों ने किसानों की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया जिन उम्मीदों में उन्होंने अपने भविष्य के सुनहरे सपनों की नींव बना रखी थी.
ऐसे हालात में एकबार फिर कुदरत के कहर से यहां का किसान कराहने लगा है. उसके समाने अपने परिवार के भरण पोषण का संकट पैदा हो गया है. ऐसे में देखना यह होगा कि सूबे की योगी सरकार इन किसानों को कब और कैसे राहत पहुंचाएगी?