राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में से एक यूपी के दो बार मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे. कल्याण सिंह के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज राजनीतिज्ञों ने शोक व्यक्त किया है. सियासतदान हों या जनता, अपने चहेते नेता को हर कोई अपने-अपने तरीके से याद कर रहा है.
साल 1996 के विधानसभा चुनाव में एटा के जीआईसी मैदान में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की चुनावी रैली होनी थी. कल्याण सिंह चुनावी रैली को संबोधित करने वाले थे कि तभी अचानक आसमान में काली घटाएं छा गईं. बिजली कड़कने लगी. कल्याण सिंह का भाषण सुनने पहुंची जनता में मौसम का रंग देख खलबली मच गई. घनघोर बारिश की आशंका से लोग खिसकने का मूड बनाने लगे.
इसी बीच कल्याण सिंह मंच पर पहुंचे और माइक पकड़ते हुए बोले- हैलो राम लला, मैं कल्याण सिंह बोल रहा हूं. अभी एक सभा होनी है. जब तक सभा चले तब तक वर्षा न हो. कल्याण सिंह का इतना कहना था कि भीड़ जाते-जाते रुक गई. संयोग था जब तक जनसभा चली, बारिश नहीं हुई और जैसे ही सभा समाप्त हुई तेज बारिश होने लगी. यह देख भीड़ कल्याण सिंह की जय-जयकार करने लगी. इस चुनाव में एटा से बीजेपी को आठ में से पांच सीटों पर जीत मिली थी.
छह महीने के अंदर पहुंचते थे एटा
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को एटा और कासगंज के लोगों से बेहद लगाव था. ऐसा कभी नहीं हुआ जब वे छह महीने के अंदर एटा न आए हों. एटा के सैकड़ों लोगों के नाम कल्याण सिंह की जुबान पर रहते थे. राजस्थान का राज्यपाल बनने के बाद सड़क हादसे में एटा के पूरा गांव में 22 लोगों की मौत हो गई थी. तब कल्याण सिंह से नहीं रहा गया और वे लोगों को सांत्वना देने एटा आए थे. गांव पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मिले. एक-एक मृतक के संबंध में उन्होंने जानकारी ली और जैसे ही मृतकों की सूची में परिचितों के नाम आए, वे भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल आए. पिता को रोते देख सांसद राजवीर सिंह की भी आंखें छलछला आई थीं.
कासगंज से ही लड़ा था पहला चुनाव
कल्याण सिंह जब राजस्थान के राज्यपाल थे, तब भी वे एटा के लोगों का ध्यान रखते थे. कल्याण सिंह राजभवन से भी फोन पर लोगों का हाल चाल लेते रहते थे. अगर कोई फोन पर सम्पर्क करता तो वे उसे राजभवन में बड़े सम्मान के साथ बुलाते थे और उसकी पूरी बात सुनते थे. राम मंदिर आंदोलन के बाद जब 1993 में विधान सभा चुनाव हुआ तो कल्याण सिंह ने कासगंज से पहला चुनाव लड़ा और जीते. ये चुनाव काफी रोचक रहा था क्योंकि तब एटा की ही निधौली विधानसभा सीट से मुलायम सिंह यादव भी चुनाव मैदान में थे. दो-दो मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने से एटा पर पूरे देश की नजर टिक गई थी.
कल्याण सिंह कासगंज के अलावा अतरौली विधानसभा सीट से भी चुनाव मैदान में थे और जनता ने उन्हें दोनों सीट से विजयी बना दिया. जीत के बाद कल्याण सिंह ने कासगंज की सीट छोड़ दी थी. कल्याण सिंह ने जब बीजेपी छोड़कर अपनी पार्टी जनक्रांति पार्टी बनाई, तब भी पहला उम्मीदवार एटा से ही उतारा और जिताया भी. दरअसल सोरो विधानसभा सीट से विधायक ओमकार सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कल्याण सिंह ने देवेंद्र प्रताप सिंह को पार्टी का उम्मीदवार बनाया. कल्याण सिंह ने कासगंज में करीब एक महीने तक डेरा डालकर खुद प्रचार की जिम्मेदारी उठाई. देवेंद्र प्रताप सिंह 186 वोट के करीबी अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे थे.