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शादी के बाद 60% दुल्हनें नहीं पहुंचीं साजन के घर, सामूहिक विवाह समारोह में हो रही महज रस्म अदायगी

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकार आर्थिक रूप से गरीब लड़कियों की शादी कराती है. इस योजना में 51000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. इसमें लाभार्थी को राशि का कुछ हिस्सा बैंक अकाउंट में दिया जाता है, वहीं शेष पैसे विवाह के लिए बर्तनों, जेवरात समेत अन्य खर्चों के लिए दिए जाते हैं.

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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बेमतलब साबित हो रही है.
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बेमतलब साबित हो रही है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सामूहिक विवाह के बाद दुल्हनें फिर से पहुंच गईं मायके
  • सिर्फ जयमाल डालकर ही प्राप्त किया सामान और नगदी

UP Samuhik Vivah Yojana: गरीबों की शादी कराने के लिए चलाई जा रही उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बेमतलब साबित हो रही है. सम्मेलन में शादी करने वाली 60 फीसदी दुल्हनें अपनी ससुराल तक नहीं पहुंची हैं. क्योंकि सरकारी विवाह के बाद अब कोई दो सप्ताह बाद तो कोई एक माह बाद शादी करने जा रहा है. इन शादियों को लेकर परिजनों ने रिश्तेदारों को कार्ड बांट दिए गए हैं. सामूहिक विवाह समारोह में महज रस्म अदायगी की गई है, जिससे सरकार की तरफ से धनराशि मिल सके. 

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महोबा जिले में 11 दिसंबर को 263 जोडों की प्रशासन ने शादी कराई. सम्मेलन में हुए कुल विवाहों के 80 फीसदी से अधिक जोड़ों ने शादी की पूरी रस्म अदायगी किए बिना ही केवल जयमाला डालकर शासन की तरफ से दी जाने वाली नगद धनराशि और सामान प्राप्त कर लिए.

सामूहिक विवाह कार्यक्रम में रस्म अदायगी के बाद जोड़े दोबारा शादी कर रहे हैं.

जिले के कबरई कस्बे में ही प्रसिद्ध सत्ती माता प्रांगण में 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन' का आयोजन नगर पंचायत द्वारा किया गया था, जिसके तहत कुल 116 जोड़ों का जयमाल कार्यक्रम जिले के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ. इस दौरान सभी जोड़ों को शासन की तरफ से निर्धारित नगद धनराशि और जेवरात प्रदान किए गए. यहां कई जोड़ों ने जयमाल कार्यक्रम भी संपन्न किया गया, लेकिन अब उनके विवाह कार्यक्रम महीनों बाद घर या धर्मशालाओं से संपन्न होने हैं.

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केस-1: 18 फरवरी को बेंदों से हरीसिंह के पुत्र रूपेन्द्र की बारात कस्बे के विवेक नगर आनी है] तो वहीं बम्हौरी कलां के मोतीलाल के बेटे प्रदीप और कदौरा के हरीशंकर के पुत्र भूपसिंह का 16 फरवरी को कस्बे के अम्बेडकर नगर में विवाह होना तय है. जिसको लेकर रिश्तेदारों को कार्ड बांट दिए गए हैं. इनकी शादी भी 11 दिसंबर को सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हो चुकी है.

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बेमतलब साबित हो रही है.

केस-2: 11 जनवरी को महेवा के शंकरदीन कुशवाहा के पुत्र प्रदीप की बारात धरौन जानी है, जिसको लेकर परिजन तैयारियां करने में जुटे हैं. मगर प्रशासन से वैवाहिक योजना का लाभ लेकर अब पैसा खर्च कर शादी होगी.

क्या बोले जिम्मेदार
समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि जिले में सामूहिक विवाह समारोह में विधिवत शादी की सभी रस्में पूरी कराई जाती हैं. अगर कोई दोबारा से शादी कर रहा है तो इसकी जानकारी नहीं है. मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी.

-महोबा से नाहिद अंसारी की रिपोर्ट 

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