पराली जलाए जाने के कारण हर साल दिल्ली एनसीआर के लोगों को मुश्किलों से जूझना पड़ता है. पराली जलाए जाने के कारण आसमान में छाई धुंध के कारण लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. शासन-प्रशासन की ओर से दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन हर साल हालात ऐसे ही रहते हैं. बढ़ते प्रदूषण को लेकर गाजियाबाद जिला प्रशासन ने जीआरएपी सिस्टम (ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान) लागू किया है. पराली को लेकर गाजियाबाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है.
जिला प्रशासन ने मुरादनगर के भिक्कनपुर गांव में गोष्ठी आयोजित कर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया. किसानों को पराली जलाने के नुकसान की जानकारी दी गई और न जलाने के फायदे भी बताए गए. इस दौरान गाजियाबाद के जिलाधिकारी (डीएम) अजय शंकर पांडेय ने खुद फसल काटकर यह समझाया कि कैसे काटने पर पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
जिलाधिकारी ने किसानों को फसल काटने का सही तरीका बताया और कहा कि इससे खेत में कम से कम पराली बचेगी, जिसे जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने यह बताया कि जब खेतों में फसल के छोटे अवशेष बचेंगे तो वो जुताई के दौरान मिट्टी में दब जाएंगे और खुद ही खाद में तब्दील हो जाएंगे. इससे पराली जलाने से बचा जा सकेगा और प्रदूषण के स्तर को भी नियंत्रित रखा जा सकेगा. डीएम ने कहा कि पराली का इस्तेमाल पशुओं के चारे के लिए किए जाने का प्रयास हो.
डीएम ने कहा कि जिला प्रशासन की पूरी कोशिश रहेगी कि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके. उन्होंने कहा कि हाल ही में पराली जलाने वाले किसानों के साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी. डीएम ने कहा कि प्रशासन की पूरी कोशिश रहेगी कि जिले में पराली जलाने की घटनाएं न होने दी जाएं. डीएम अजय शंकर पांडेय के इस अनूठे अंदाज की लोग भी तारीफ कर रहे हैं.