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प्रयाग कुंभ 2019: जूना अखाड़े से निष्कासित हुए गोल्डन बाबा

बताया जा रहा है कि गोल्डन बाबा पर धोखाधड़ी और मेले में पुलिसकर्मियों को हरिद्वार ले जाने के लिए धमकाने का आरोप लगा है. जिसके बाद उन्हें और उनके अन्य पदाधिकारियों को निष्कासित कर उनके सभी अधिकार छीन लिए हैं. गोल्डन बाबा की जगह महासभा ने श्रीमहंत केदारपुरी को रमता पंच बनाया है. वहीं, थानापति मनोहर पुरी की जगह भोला पुरी को जिम्मेदारी दी गई है.

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गोल्डन बाबा.
गोल्डन बाबा.

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प्रयागराज में अर्द्ध कुंभ 2019 शुरू भी नहीं हुआ है कि यहां अखाड़ों में साधु-संतों के बीच विवाद सामने आ रहे हैं. यहां श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े ने मशहूर गोल्डन बाबा को निष्कासित कर दिया है. गोल्डन बाबा पर अखाड़े के संविधान के उल्लघंन का आरोप लगा है. उनके अलावा श्री महंत देवेंद्र पूरी, महंत थानापति शिव ओम पूरी, थानापति मनोहर पूरी, सन्यासिनी श्री महंत पूजा पूरी को निष्काषित किया है.  

यह कार्रवाई गोल्डन संतों की महासभा ने रविवार को की. बताया जा रहा है कि गोल्डन बाबा पर धोखाधड़ी और मेले में पुलिसकर्मियों को हरिद्वार ले जाने के लिए धमकाने का आरोप लगा है. जिसके बाद उन्हें और उनके अन्य पदाधिकारियों को निष्कासित कर उनके सभी अधिकार छीन लिए हैं. गोल्डन बाबा की जगह महासभा ने श्रीमहंत केदारपुरी को रमता पंच बनाया है. वहीं, थानापति मनोहर पुरी की जगह भोला पुरी को जिम्मेदारी दी गई है.

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इस बारे में अखाड़ा के कुंभ मेला प्रभारी एवं प्रवक्ता स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने बताया कि गोल्डन बाबा की जगह श्रीमहंत केदार पुरी को रमता पंच बनाया गया है, जबकि मनोहर पुरी की जगह भोला पुरी को अखाड़ा का थानापति बनाया गया है. उन्होंने कहा कि महंत हरि गिरि जूना अखाड़ा में अनुशासन सर्वोपरि है, इसलिए लोकतांत्रिक तरीके से पांच महंतों को निष्कासित किया गया है.

यह फैसला 52 महंतों में से दो तिहाई से ज्यादा के अनुमोदन के बाद पांचों महंतों, को अखाड़े से अलग के बाद लिया गया है. बताया जा रहा है कि निष्कासित किए गए महंतों को अखाड़े की ओर से ना तो भूमि मिलेगी और न ही किसी तरह की अन्य सुविधाएं.

नोटबंदी को लेकर सरकार पर साधा था गोल्डन बाबा ने निशाना...

शरीर पर 20 किलो सोना पहनने वाले गोल्डन बाबा ने प्रयागराज आने के बाद नोटबंदी को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि नोटबंदी के कारण कुंभ में शिविर लगाना मुश्किल हो रहा है. यदि कोई भक्त सहायता करेगा तो वो शिविर लगाएंगे. उन्होंने बताया था कि कुंभ में शिविर लगाने के लिए दो से ढाई करोड़ रुपयों की जरूरत है. शिविर लगाने में टेंट के लिए ही 20 से 25 लाख रुपये देने पड़ते हैं. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद उन्हें आश्रम का खर्च चलाने के लिए जहां कई दुकानें और संपत्तियां बेचनी पड़ी हैं, वहीं कैश भी अब लगभग खत्म हो चुका है.

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