वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के बाद ही शिवलिंग का दावा किया गया, जिससे यह मामला तूल पकड़ लिया है. ये सर्वे पांच महिलाओं की ओर से दायर याचिका पर हो रहा है. वाराणसी की अदालत में याचिका दाखिल करने वाली इन पांच महिलाओं में लक्ष्मी देवी, राखी सिंह, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक शामिल हैं. मामले की अगुवाई राखी सिंह कर रही हैं.
आजतक ने इन सभी महिलाओं से बातचीत की, जिसमें वाराणसी की मंजू व्यास भी शामिल हैं. राम घाट में रहने वाली मंजू व्यास एक समाज सेविका हैं, जिनकी मांग है कि रोजाना मां शृंगार गौरी के दर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए ताकि भक्तों को चौखट के दर्शन करके लौटने को मजबूर न होना पड़े.
'हम मंदिर बनाकर रहेंगे'
आजतक से बात करते हुए मंजू व्यास ने कहा कि पूरी उम्मीद है कि हम मंदिर बनाकर रहेंगे. मंजू व्यास की तरह रेखा पाठक भी इस संघर्ष में अहम रोल निभा रही हैं. रेखा का घर वाराणसी के हनुमान फाटक के पास है. रेखा कहती हैं कि ज्ञानवापी सभी की आस्था का केंद्र बिंदु है, जिस पर हुए कब्जे को छुड़ाने की लड़ाई आखिर तक जारी रहेगी
रेखा पाठक ने कहा कि जैसे बाबा मिले हैं न, उसी तरह अगल बगल मलवा है उसे भी हटवाया जाए. शिवलिंग या फव्वारे के सवाल पर रेखा पाठक ने कहा कि नहीं वो बाबा हैं, वो शिवलिंग हैं, जैसे केदारनाथ है उसी तरह से बाबा हैं.
ज्ञानवापी को मंदिर बताने वालों में दिखा उत्साह, भजन गाकर रखी अपनी बात.
— AajTak (@aajtak) May 18, 2022
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कई बार मां शृंगार गौरी की पूजा कर चुकी हैं सीता
वाराणसी के चेतगंज की रहने वाली सीता साहू इस मामले में एक और याचिकाकर्ता हैं. सीता समाज सेविका हैं, जिनका कहना है कि वो कई बार मां शृंगार गौरी की पूजा कर चुकी हैं लेकिन मां शृंगार गौरी का मंदिर, मस्जिद के अंदर बनने से आम लोग अंदर नहीं जा सकते, इजाजत न होने से सिर्फ बाहर से पैर छूने पड़ते हैं.
सीता साहू ने आजतक से बात करते हुए कहा कि हम लोग गौरी को खोजने गए थे, मिल गए शिव बाबा, तो जहां शिव रहेंगे वहीं शक्ति मिलेगी, दोनों का मिलना जरूरी है, शिव के साथ शक्ति जुड़ी है, शक्ति के साथ शिव जुड़े हैं, वो हमारे विश्वेश्वर जी हैं, द्वादश लिंग में वो शामिल हैं, हम लोगों के दावे में दम है. दीवारों पर चित्रकारी मंदिर के सबूत देते हैं, वो मंदिर है बस.
सोहन लाल आर्य की पत्नी भी हैं याचिकाकर्ता
ज्ञानवापी मामले में लक्ष्मी देवी भी याचिकाकर्ता हैं, जो वाराणसी के महमूरगंज इलाके की रहने वाली हैं. पति डॉक्टर सोहन लाल आर्य ने भी 1996 में ज्ञानवापी को लेकर अदालत में एक मामला दर्ज कराया था. इसके बाद ज्ञानवापी का निरीक्षण भी हुआ था, लेकिन कोई सर्वे नहीं हो सका. लक्ष्मी ने मीडिया को बताया कि पति भी चाहते थे कि मैं इस मामले को उठाऊं.
लक्ष्मी ने कहा कि ये मां शृंगार गौरी का मुद्दा है, इसलिए मैंने याचिका दायर की. दिल्ली के हौज खास की रहने वाली राखी सिंह इस मामले की अगुवाई कर रहीं हैं. इस तरह पांच महिलाओं की याचिका ने ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे का रास्ता साफ किया, जिसमें हिंदू पक्ष शिवलिंग मिलने का दावा कर रहा हैं.
(रिपोर्ट- आजतक ब्यूरो)