
पूरे देश में शुक्रवार को हनुमान जयंती मनाई जाएगी. ऐसे में यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित प्राचीन मंदिर में भी हनुमान जयंती मनाई जाएगी. लखनऊ की अति प्राचीन पुराने हनुमान मंदिर के महंत श्री गोपाल दास ने बताया कि हनुमान जयंती के अवसर पर सुबह 8 बजे हनुमान जी का विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रृंगार किया जाएगा. श्रृंगार के उपरांत हनुमान जी की आरती की जाएगी और लड्डू और पेड़े के साथ-साथ केले भी चढ़ाए जाएंगे. उसके बाद प्रसाद के तौर पर इन चीजों को भक्तों में वितरण किया जाएगा.
प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत गोपाल दास ने बताया कि 10 किलो का बेसन का लड्डू जयंती पर बनाया जाएगा. इसके बाद भंडारे का भी आयोजन होगा, जिसमें 200 लोगों की खाने की व्यवस्था की जाएगी. पूड़ी के साथ लौकी और आलू की सब्जी रहेगी. दोपहर 3 बजे से लेकर रात शाम 5 बजे तक सुंदरकांड का आयोजन किया जाएगा. 5 बजे के बाद से 6 तक भजन और कीर्तन का कार्यक्रम है. 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक सुंदरकांड किया जाएगा और 1 घंटे का भजन कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन होगा, जो रात 10 बजे तक चलता रहेगा.
महंत गोपालदास ने अति प्राचीन मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि मंदिर कितना पुराना है, यह बता पाना संभव नहीं है. त्रेता युग में भगवान श्रीराम लंका जीत के बाद जब अयोध्या लौटने के बाद श्री रामचन्द्र ने सीता जी को त्याग दिया और जिसके बाद लक्ष्मण जी और हनुमान जी माता सीता को लेकर कानपुर जिले के बिठूर, जहां वाल्मीकि आश्रम था, उसके लिए प्रस्थान किया.
महंत गोपालदास बताते हैं कि ऐसा बताया जाता है कि वाल्मीकि आश्रम जाते वक्त रास्ते में जब काफी अंधेरा हो गया था तो मां सीता यहीं पर विश्राम करने के लिए लक्ष्मण और हनुमान संग आईं थीं, लेकिन लक्ष्मण जी गोमती के उस पार अयोध्या राज्य की चौकी में विश्राम करने चले गए, किन्तु सीता जी नहीं गईं. उनका मानना था कि वह राजभवन की सीमा में नहीं जाएंगी और इसी बाग में रूक गईं, जहां हनुमान जी रात भर उनका पहरा देते रहे. दूसरी सुबह माता सीता ने यहां से वाल्मीकि आश्रम के लिए प्रस्थान कीं.
अति प्राचीन मंदिर के महंत बताते हैं कि कालांतर में इसी बाग में हनुमान जी मूर्ति स्थापित की गई और अवध के नवाब की बेगम आलिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. ऐसा कहा जाता है उनको संतान की प्राप्ति नहीं हो रही थी. एक दिन स्वप्न में हनुमान जी के दर्शन हुए, तभी उन्होंने ठाना कि मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और फिर उन्हें संतान की प्राप्ति हुई. मंदिर के गुम्बद के ऊपर चांद के आकृति का मीनार रखवाया जबकि हिंदुओं के मंदिर पर सबसे ऊपर त्रिशूल होता है. मंदिर के खुलने का समय सुबह 5 से रात 11 बजे तक है. मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार प्रसिद्ध ऋषि-मुनियों की कई नक्काशीदार मूर्तियां हैं.
लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने स्थित हनुमान सेतु मंदिर पर भी हनुमान जयंती बढ़-चढ़कर मनाई जाएगी. मंदिर के महंत भगवान सिंह बिष्ट ने बताया कि हनुमान जयंती के अवसर पर रामचरितमानस का पाठ किया जाएगा. सुबह 10 बजे पूजा और हवन किया जाएगा. इस अवसर पर हनुमान जी का पंचामृत से अभिषेक भी किया जाएगा. पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का प्रयोग करते हुए हनुमान जी का अभिषेक, हनुमान जी के मंत्रोच्चारण के साथ किया जाएगा.
अभिषेक के उपरांत मंदिर प्रांगण में मौजूद समस्त देवी देवताओं की भी आरती की जाएगी. हनुमान जी की विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शंख, डमरू, घंटा और घड़ियाल का भी इस्तेमाल किया जाएगा. भगवान सिंह बिष्ट बताते हैं कि हनुमान जयंती के मौके पर 20 हज़ार बूंदी के लड्डू देशी घी के बनाए जाएंगे. मंदिर को पूरी तरीके से सजाया जाएगा, जिसमें पुष्प श्रृंगार और विद्युत यानी की लाइटिंग से भी श्रृंगार किया जाएगा.
हनुमान सेतु स्थित हनुमान मंदिर के सेक्रेटरी दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि जयंती के मौके पर सुबह से भक्तों का तांता लगा रहेगा. सुबह जो भक्तगण आएंगे उनकी एंट्री सामने वाले फाटक यानी कि मुख्य द्वार से होगी लेकिन दोपहर 12 बजे के उपरांत मुख्य द्वार को बंद कर दिया जाएगा क्योंकि गर्मी का दिन है और धूप तेज होती है. साथ ही साथ मुख्य द्वार सड़क पर पड़ता है ऐसे में ट्रैफिक जाम होने की भी समस्या रहती है, इसलिए दोपहर 12 बजे के उपरांत मुख्य द्वार को बंद कर के पीछे के द्वार खोल दिए जाएंगे, जहां से भक्तगण मंदिर प्रांगण में प्रवेश करेंगे.
दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि पुरुष और महिलाओं की अलग-अलग लाइन लगवाई जाएंगी, गर्मी का मौसम है तो ऐसे में भक्तों को कोई दिक्कत ना हो इसलिए कूलर और पंखे की भी व्यवस्था की जाएगी ताकि लाइन में लगे हुए भक्तों को गर्मी का सामना ना करना पड़े. 1960 में बाबा नीम करोली जो सिद्ध संत थे, जिनकी चेतना आज भी मौजूद है. पहले जहां आज मंदिर है उसके ठीक पीछे गोमती तट पर वह रहते थे. वहां पर सर्वप्रथम हनुमान जी की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा किया था. बाद में 1967 में बाबा नीम करौली ने मूर्ति को वहां से यहां पर स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा किया, क्योंकि गोमती तीर पर होने के कारण जब बाढ़ आती थी तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.
मान्यता है कि हनुमान जी के दर्शन उपरांत मंदिर प्रांगण में बने बाबा नीम करौली के जो दर्शन करता है और मन से जो किसी चीज की कामना करता है उसे निश्चित तौर पर मिलता है और भक्तों की कामना पूर्ण होती है.