हाथरस में पिछले दिनों में आरएलडी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पर पुलिस वालों ने जिस तरह अचानक और बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया था, उसे लेकर पश्चिम यूपी की सियासत गरमा गई है. आरएलडी महापंचायत के जरिए जाट समुदाय का स्वाभिमान जगाकर उन्हें फिर से एकजुट करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में यूपी के उपचुनाव रण में गुरुवार को उतरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण के सहारे राजनीतिक समीकरण को साधने की कवायद करते नजर आए.
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गुरुवार को बुलंदशहर की सदर विधानसभा से उपचुनाव की रैली की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत भी मैंने बुलंदशहर से की थी और कहा था बीजेपी आएगी तो गुंडा राज खत्म होगा, बेटियों की रक्षा होगी. परिणाम सामने है. इसके बाद सीएम योगी ने अमरोहा के नौगांवा सादात और टूंडला विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए रैली को संबोधित किया.
योगी ने चरण सिंह के नाम पर मांगा वोट
सीएम योगी ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों की चिंता की, लेकिन उनके नाम पर राजनीति करने वालों ने कभी किसानों के बारे में नहीं सोचा. पिछली सरकारों ने किसानों की चिंता की होती तो चीनी मिलों का विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण हुआ होता. बीजेपी सरकार में यह सारे कार्य तेजी से हो रहे हैं. चौधरी चरण सिंह के सपनों को साकार करने का काम बीजेपी ही कर सकती है कोई और दूसरी पार्टी नहीं.
राजा महेंद्र सिंह का किया जिक्र
योगी ने कहा कि अलीगढ़ के महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बनाने के लिए अपनी पूरी संपत्ति दान कर दी, लेकिन उनके नाम की एक शिला भी नहीं लगी. ऐसे में हमारी सरकार ने राजा महेंद्र सिंह के नाम विश्वविद्यालय बना रही है. विपक्ष पर प्रहार करते हुए सीएम कहा कि कैराना और कांधला के व्यापारियों का पलायन कराने और मुजफ्फरपुर में दंगों की श्रृंखला खड़ी कर किसी निर्दोष सचिन और गौरव को मरवाने के लिए तुम्हारे जातिवादी नारे होते हैं.
मुजफ्फरनगर दंगा की चर्चा
बता दें कि चौधरी चरण सिंह किसान नेता के साथ-साथ जाट समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं. ऐसे में राजा महेंद्र सिंह जाट समुदाय से हैं. इसके अलावा सीएम योगी ने मुजफ्फरनगर के सचिन और गौरव का जिक्र किया है, वो जाट समुदाय से थे और इसी हत्या के बाद दंगा भड़का था. इस दंगे ने यूपी की सियासत बदलकर रख दी है. जाट-मुस्लिम के बीच गहरी खाई पैदा हो गई है, जो अभी तक नहीं भर सकी है.
ऐसे में सीएम योगी के उपचुनाव में जाट नेताओं के साथ-साथ मुजफ्फरनगर दंगे के जिक्र को सियासी समीकरण साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. बुलंदशहर सीट पर आरएलडी बनाम बीजेपी के बीच सियासी मुकाबला माना जा रहा है.
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जाट समुदाय आरएलडी का साथ छोड़कर बीजेपी के पक्ष में एकजुट हुआ तो चौधरी चरण सिंह की विरासत संभालने वाले चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी भी अपनी सीट नहीं बचा पाए थे. एक के बाद एक चुनाव में मिली हार के बाद आरएलडी के सियासी वजूद पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं. ऐसे में आरएलडी की खोई सियासी जमीन को वापस लाने की जिम्मेदारी जयंत चौधरी के कंधों पर है. जयंत चौधरी अपनी पार्टी को दोबारा से खड़ा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
हाथरस के बहाने जयंत की जाट राजनीति
हाथरस में जयंत चौधरी पर हुए लाठीचार्ज से आरएलडी के लिए जाट समुदाय का बीजेपी के खिलाफ स्वाभिमान जगाने का मौका हाथ लग गया. मुजफ्फरनगर और मथुरा में महापंचायत में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह के बेटे और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अभय सिंह चौटाला भी पहुंचे थे, इन सभी ने जाट स्वाभिमान को मुद्दा बनाने का दांव चला था. पंचायत में आए नेताओं में से ज्यादातर ने एकसुर में कहा कि जाट समाज के मान सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
जाट समुदाय के नेताओं ने यूपी की योगी सरकार को चेताया कि लाठीचार्ज से किसान समाज की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. ऐसा करने पर सूबे की सत्ता पर सरकार नहीं रहेगी. सभी नेताओं ने कहा कि यहां भाईचारा मजबूत है. अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े रहने और 'हम साथ-साथ हैं' का संदेश दिया. साथ ही चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी और सड़कों पर जंग लड़ने का एलान भी आरएलडी ने किया था. ऐसे में सीएम योगी ने मुजफ्फरनगर दंगे से लेकर चौधरी चरण सिंह और राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जिस तरह से जिक्र किया है, उससे सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं. बीजेपी के इस दांव को जाट समुदाय को साधने के तौर पर देखा जा रहा है.