हाथरस कांड में एसआईटी टीम की जांच अंतिम दौर में है. एसआईटी कल अपनी रिपोर्ट सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है. गृह सचिव भगवान स्वरूप की अगुवाई में डीआईजी चन्द्र प्रकाश और एसपी पूनम ने जांच की है. एसआईटी को सात दिन की मोहलत मिली थी, जो कल पूरी हो रही है.
सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि हम पीड़ित पक्ष और गवाहों के सुरक्षा के यूपी सरकार के बयान को दर्ज कर रहे हैं या आप हलफनामा दाखिल करें. इस पर सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कल तक दाखिल कर देंगे.
इसके बाद सीजेआई ने कहा कि ठीक है, आप गवाहों की सुरक्षा को लेकर किए इंतजामों पर और पीड़ितों की सुरक्षा के बारे में हलफनामे में पूरी जानकारी दें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो सुनिश्चित करेगा कि हाथरस मामले की जांच सही तरीके से चले.
सुनवाई के दौरान वकील कीर्ति सिंह ने कहा कि मैं कोर्ट की महिला वकीलों की तरफ से बोल रही हूं. हमने रेप से जुड़े कानून पर काफी अध्यययन किया है. यह एक झकझोरने वाली घटना हुई है.
इस पर सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि हर कोई कह रहा है कि घटना झकझोरने वाली है. हम भी यह मानते हैं. तभी आपको सुन रहे हैं, लेकिन आप इलाहाबाद हाई कोर्ट क्यों नहीं गईं? क्यों नहीं मामले की सुनवाई पहले हाई कोर्ट करे, जो बहस यहां हो सकती है, वही हाई कोर्ट में भी हो सकती है. क्या ये बेहतर नहीं होगा कि हाई कोर्ट मामले की सुनवाई करे?
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबड़े ने कहा कि हम ये भी देखना चाहते हैं कि इस मामले में याचिकाकर्ता का लोकस है या नहीं, लेकिन अभी हम केवल मामले की सुनवाई इसलिए कर रहे है कि ये एक शॉकिंग केस है.
हाथरस गैंगरेप केस में सुनवाई शुरू हो गई है. याचिकाकर्ता की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि पीड़ित परिवार सीबीआई जांच से संतुष्ट नहीं है, वो एसआईटी जांच चाहती है, जिसकी निगरानी कोर्ट करे.
हाथरस गैंगरेप पीड़िता के गांव में नेताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है. आज सीता राम येचुरी, डी राजा और वृन्दा करात पहुंचे हैं. ये लोग पीड़ित परिवार से मुलाकार कर रहे हैं.
हाथरस गैंगरेप केस में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया कि प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा यूपी सरकार को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रचा जा रहा है. दंगे कराने के लिए जानबूझकर और सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं. परिवार की सहमति से पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया था.
उत्तर प्रदेश सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया, जिसमें सरकार ने कहा कि अदालत को हाथरस में लड़की के साथ कथित बलात्कार और हमले की सीबीआई जांच के निर्देश देने चाहिए. यूपी सरकार ने कहा कि हालांकि वो मामले की निष्पक्ष जांच करा सकती है लेकिन "निहित स्वार्थ" निष्पक्ष जांच को पटरी से उतारने के मकसद से प्रयास कर रहे हैं.
थोड़ी देर में हाथरस कांड की CBI जांच और केस दिल्ली ट्रांसफर करने को लेकर दायर PIL पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. हाथरस में पीड़िता के परिवार की मांग पर उन्हें सुरक्षा मिल गई है.
हाथरस की निर्भया को लेकर इंसाफ की लड़ाई जारी है. इस बीच योगी सरकार ने दावा किया है कि हाथरस के बहाने यूपी में दंगा कराने की साजिश रची जा रही थी. इस मामले में दिल्ली से हाथरस आ रहे 4 संदिग्ध मथुरा से गिरफ्तार हुए हैं. इनका PFI से कनेक्शन है. दंगे की साजिश के तार भी PFI से जुड़ने का शक है. विदेश फंडिंग का भी दावा है.
हाथरस मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 सितंबर को ही गृहसचिव भगवान स्वरूप की अगुवाई में एसआईटी का गठन कर दिया था. सात दिन में कमेटी को रिपोर्ट सौंपनी है. ये मियाद कल खत्म हो रही है. आज एसआईटी की टीम उस जगह पहुंची है, जहां पीड़िता को जलाया गया था. जहां तक सीबीआई जांच की बात है तीन अक्टूबर को सीएम योगी ने ट्वीट कर केंद्रीय जांच ब्यूरो से हाथरस केस की जांच कराने का ऐलान किया था.
हाथरस की बेटी को इंसाफ कैसे मिलेगा? आज सुप्रीम कोर्ट में इस पर अहम सुनवाई का दिन है. आज सर्वोच्च अदालत में दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई है. एक जनहित याचिका में मामले की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गई है. अर्जी में मामले की सुनवाई यूपी से दिल्ली ट्रांसफर करने की भी मांग की गई है. साथ ही इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में करने की मांग की गई है.