हाथरस की निर्भया की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में भी एक दलित बेटी हैवानों की दरिंदगी का शिकार बन गई. ऐसे में राजनीतिक दलों ने यूपी की योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और राहुल गांधी आज ही पीड़िता के परिवार से हाथरस में मुलाकात करेंगे. हालांकि, प्रशासन ने हाथरस में धारा 144 लगा दी है और जिले की सीमाएं सील कर रखी हैं.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पांव जमाने की कोशिश में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के हाथ एक बड़ा मुद्दा लग गया है. यही वजह है कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी पिछले दो दिनों से हाथरस मामले में यूपी सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं और कांग्रेसी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती जमीन पर उतरने के बजाय सोशल मीडिया से आवाज बुलंद कर रहे हैं. ऐसे में प्रियंका और राहुल ने पीड़िता के परिवार से मिलने के लिए हाथरस जाने का फैसला कर साफ तौर पर सियासी संदेश देने की कोशिश की है.
यूपी में जिस तरह से क्राइम के मामले सामने आ रहे हैं उससे कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस महासचिव लगातार योगी सरकार पर निशाना साध रही हैं. प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि हाथरस जैसी वीभत्स घटना बलरामपुर में घटी, लड़की का बलात्कार कर पैर और कमर तोड़ दी गई. आजमगढ़, बागपत, बुलंदशहर में बच्चियों से दरिंदगी हुई. यूपी में फैले जंगलराज की हद नहीं. मार्केटिंग, भाषणों से कानून व्यवस्था नहीं चलती, ये मुख्यमंत्री की जवाबदेही का वक्त है जनता को जवाब चाहिए.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती हाथरस गैंग रेप मामले को लेकर जमीन पर उतरने के बजाय सिर्फ प्रेस कॉन्फेंस और सोशल मीडिया के जरिए ही आवाज उठाने की कवायद की है. इस तरह से यूपी के दोनों प्रमुख पार्टियों के नेताओं से प्रियंका गांधी आगे निकल गई हैं. यूपी के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्रा कहते हैं हाथरस ही नहीं बल्कि सोनभद्र से लेकर उन्नाव की पीड़िता से मिलने की पहल प्रियंका गांधी ने करके बता दिया था कि सूबे में विपक्ष की भूमिका कांग्रेस ही निभा रही है. प्रियंका-राहुल ने जाने की पहल करके इस मामले का क्रेडिट अपने नाम कर लिया है. अब सीएम योगी आदित्यनाथ और किसी दूसरे नेता के वहां जाने को औपचारिकता ही माना जाएगा.
प्रियंका-राहुल ने अपने इस कदम से कांग्रेसियों में उत्साह भरने के साथ-साथ बीजेपी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों में कांग्रेस को फिलहाल बढ़त भी दिला गई हैं. यूपी में करीब 30 साल से हाशिए पर चल रही कांग्रेस को संजीवनी देने की उनकी कोशिश इस मायने में कामयाब होती दिख रही है. पिछले दो दिन से प्रदेश भर के जिलों में कांग्रेसी सड़क पर उतरकर हाथरस की निर्भया को इंसाफ दिलाने की गुहार लगा रहे हैं. उन्हें पुलिस की लाठी खाने से लेकर गिरफ्तारी तक का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन संघर्ष जारी है. ऐसे में प्रियंका-राहुल के हाथरस जाने के फैसले ने उनके हौसलों को बुलंद कर दिया है.
बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा था कि ये सब सिर्फ दलितों को दबाकर उन्हें समाज में उनका 'स्थान' दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की शर्मनाक चाल है. हमारी लड़ाई इसी घृणित सोच के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि भारत की एक बेटी का रेप-कत्ल किया जाता है, तथ्य दबाए जाते हैं और अंत में उसके परिवार से अंतिम संस्कार का हक भी छीन लिया जाता है. इससे पहले राहुल ने सीधे तौर पर राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश के 'वर्ग-विशेष' के जंगलराज ने एक और युवती को मार डाला.
वहीं, प्रियंका गांधी ने कहा, 'जब पीड़िता के पिता को उसकी मौत का पता चला था, तब वो उनके साथ फोन पर थीं.' प्रियंका ने कहा है कि रात को 2.30 बजे परिजन गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन हाथरस की पीड़िता के शव को यूपी प्रशासन ने जबरन जला दिया. पीड़िता की मृत्यु के बाद सरकार ने परिजनों से बेटी के अंतिम संस्कार का अधिकार छीना और मृतका को सम्मान तक नहीं दिया. घोर अमानवीयता. आपने अपराध रोका नहीं बल्कि अपराधियों की तरह व्यवहार किया. अत्याचार रोका नहीं, एक मासूम बच्ची और उसके परिवार पर दोगुना अत्याचार किया. योगी आदित्यनाथ इस्तीफा दो. आपके शासन में न्याय नहीं, सिर्फ अन्याय का बोलबाला है.