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कानपुर: सिख दंगे के एक और मामले में जांच होगी बंद, एक अभियोगी ने किया पैरवी करने से मना

उत्तर प्रदेश में सिख दंगों के मामले में एक मुकदमा बंद किया जा रहा है. मामले में पैरवी करने वाले कनाडा में रहते हैं और उन्होंने इतने साल बाद मामले में आरोपियों की पहचान करने में असमर्थता जताई है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • अभियोगी ने आरोपियों की पहचान करने में असमर्थता जताई
  • यूपी के अलावा एमपी और चेन्नई तक में मिले गवाह

उत्तर प्रदेश में सिख दंगों के मामले में एक मुकदमा बंद किया जा रहा है. मामले में पैरवी करने वाले कनाडा में रहते हैं और उन्होंने इतने साल बाद मामले में आरोपियों की पहचान करने में असमर्थता जताई है. गौरतलब है कि पिछले दिनों कानपुर में 1984 के सिख दंगों की जांच के लिए गठित एसआईटी का कार्यकाल मई 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया था.
 
एसआईटी ने इस बीच 19 ऐसे मामलों में गवाह तलाश लिए हैं, जिनमें पुलिस ने क्लोजर रिोपोर्ट लगा चुकी है. दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों में कानपुर में 127 लोग मारे गए थे. उस वक्त दंगों को लेकर पुलिस ने कुल 1251 केस दर्ज किए थे. एसआईटी इनमें से 40 केस में विवेचना कर रही है. बता दें कि 40 मुकदमों में से 29 में स्थानीय पुलिस क्लोजर रिपोर्ट लगा चुकी है.

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इन्हीं बचे हुए मामलों में से 19 मामलों की जांच हो रही है. एसआईटी को अपनी जांच ने कई गवाह यूपी के अलावा एमपी व चेन्नई तक में मिले हैं. इनमें लगभग आठ गवाहों के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं. एसआईटी की इसी जांच के दौरान पता चला कि गवाह कनाडा में रहते हैं. 

उनके भी परिजन का कत्ल किया गया था. एसआईटी ने बात की तो इन दोनों ने इतनी लंबी अवधि के बाद आरोपियों की शिनाख्त करने में असमर्थता जताई. फिलहाल, एसआईटी ने गवाहों द्वारा मामले की पैरवी में रुचि न दिखाए जाने की रिपोर्ट दे दी गई है. जिसके बाद मामले को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी. 

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