scorecardresearch
 

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर मामले में अब 26 अप्रैल को सुनवाई

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी ममले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत अब 26 अप्रैल को सुनवाई करेगी. कोर्ट ने कमीशन की कार्रवाई पर लगी रोक जारी रखी है.

Advertisement
X
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर (फाइल फोटो)
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट ने जारी रखी परिसर के सर्वे पर लगी रोक
  • मुस्लिम पक्षकारों ने शांति भंग होने की जताई थी आशंका

काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित देवी श्रृंगार गौरी मंदिर और अन्य जगहों की वीडियोग्राफी और कमीशन के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन अब 26 अप्रैल को सुनवाई करेंगे. वहीं कोर्ट ने कमीशन की कार्रवाई पर लगी रोक जारी रखी है. 8 अप्रैल 2022 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन रविकुमार दिवाकर की अदालत ने कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को विश्वनाथ मंदिर, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी और अन्य विग्रहों और स्थानों पर कमीशन और वीडियोग्राफी 19 अप्रैल को करने का आदेश दिया था.

Advertisement

मुस्लिम पक्षकारों ने मंगलवार को जिला प्रशासन के पास भेजे ज्ञापन को आधार बनाकर कोर्ट में सर्वे के खिलाफ एक अर्जी दाखिल की थी. अर्जी में कहा गया है कि सर्वे से ज्ञानवापी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा हो सकता है. इलाके में तनाव बढ़ने से शांति और सुरक्षा भंग हो सकती है. इसके बाद सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट ने बुधवार तक के लिए कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.

दोनों पक्ष क्या कर रहे हैं दावे

-  ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि इस विवादित ढांचे के नीचे ज्योतिर्लिंग है. यही नहीं ढांचे की दीवारों पर देवी देवताओं के चित्र भी प्रदर्शित है. दावा किया जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब ने 1664 में नष्ट कर दिया था. फिर इसके अवशेषों से मस्जिद बनवाई, जिसे मंदिर की जमीन के एक हिस्से पर ज्ञानवापी मस्जिद के रूप में जाना जाता है.

Advertisement

- प्रतिवादी पक्ष (ज्ञानवापी मस्जिद) अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल प्रतिवाद पत्र में दावा किया गया कि यहां विश्वनाथ मंदिर कभी था ही नहीं और औरंगजेब बादशाह ने उसे कभी तोड़ा ही नहीं. जबकि मस्जिद अनंत काल से कायम है. उन्होंने अपने परिवाद पत्र में यह भी माना कि कम से कम 1669 से यह ढांचा कायम चला आ रहा है. 

Advertisement
Advertisement