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ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कानून का उल्लंघन, एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता खोल रहा कोर्ट: ओवैसी

वाराणसी में काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी समेत कई विग्रहों का सर्वे किया जा रहा है. इसे लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कोर्ट एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता खोल रही है.

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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (फाइल फोटो)
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट कमिश्नर की अगुवाई में आज भी होगा सर्वे
  • चप्पे-चप्पे पर बढ़ाई गई है सुरक्षा व्यवस्था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी चर्चा के केंद्र में है. दरअसल, काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी समेत कई विग्रहों का सर्वे किया जा रहा है. ये सर्वे वाराणसी के सीनियर जज डिविजन के आदेश पर हो रहा है. अब इस मामले में पॉलिटिक्स की एंट्री भी हो गई है. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कानून का उल्लंघन है. 

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असदुद्दीन ओवैसी ओवैसी ने कहा कि काशी की ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण करने का ऑर्डर 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का खुला उल्लंघन है. उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह अधिनियम भारत की धर्मनिरपेक्ष विशेषताओं की रक्षा करता है, जो कि संविधान की बुनियादी विशेषताओं में से एक है. 

 

ओवैसी ने सर्वे के फैसले को एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता खोलने वाला भी बताया है. AIMIM के प्रमुख ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोर्ट की ओर से सुप्रीम कोर्ट की खुलेआम अवहेलना की जा रही है. इस आदेश से कोर्ट 1980-1990 के दशक की रथ यात्रा के हुए खून-खराबे और मुस्लिम विरोधी हिंसा का रास्ता खोल रही है.

बता दें कि शुक्रवार को जब सर्वे करने के लिए टीम यहां पहुंची तो दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी की गई थी. काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में आज भी वीडियोग्राफी होनी है.

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जानिए क्या है पूरा मामला

काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का केस भले ही वर्ष 1991 से वाराणसी के स्थानीय अदालत में चल रहा हो और फिर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही हो, लेकिन मां श्रृंगार गौरी का केस महज साढ़े 7 महीने ही पुराना है. 18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पांच महिलाओं ने बतौर वादी वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना दर्शन-पूजन की मांग सहित अन्य मांगों के साथ एक वाद दर्ज कराया था, जिसको कोर्ट ने स्वीकार करते हुए न केवल मौके की स्थिति को जानने के लिए वकीलों का एक कमीशन गठित करने अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश दिया था. विपक्षियों को नोटिस जारी करने के साथ ही सुनवाई की अगली भी तय कर दी थी, लेकिन दो-दो बार कोर्ट कमिश्नर के बैकफुट पर चले जाने के चलते विवादित स्थल का मौका मुआयना नहीं हो सका था.

10 से पहले मांगी रिपोर्ट

वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक के जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने पुराने 18 अगस्त के ही आदेश को दोहराते हुए बीते 8 अप्रैल को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त करते हुए कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई करने की फिर से अनुमति दे दी थी. इसके बाद प्रतिवादियों में से वाराणसी जिला प्रशासन और कमिश्नरेट पुलिस ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कार्रवाई को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मस्जिद में मुस्लिमों और सुरक्षाकर्मियों के ही जाने की दलील दी थी, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई के बाद दलील को खारिज करते हुए अपने पुराने आदेश के जारी रखते हुए ईद के बाद कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई करके 10 मई के पहले तक रिपोर्ट मांगी है और सुनवाई की तारीख भी 10 मई नियत कर दी है.

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