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किसान आंदोलन का सेंटीमेंट, बदलते सामाजिक समीकरण... पश्चिमी यूपी से इसलिए मैदान में उतर रही हैं प्रियंका गांधी

भारतीय किसान यूनियन की पंचायत हो या आरएलडी नेता जयंत चौधरी की महापंचायत, सभी में किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है. मौके की नजाकत को समझते हुए कांग्रेस ने भी पश्चिमी यूपी में अपनी सियासी जड़ें जमाने की कवायद शुरू कर दी है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को सहारनपुर के चिलकाना में किसान महापंचायत के जरिए पश्चिमी यूपी के समीकरण को साधने की कोशिश करेंगी. 

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पश्चिमी यूपी में किसान पंचायतों का दौर शुरू हो गया है
  • सहारनपुर की किसान पंचायत में शामिल होने के मायने
  • पश्चिम यूपी में जाट-मुस्लिम निर्णायक भूमिका में हैं

कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते महापंचायतों का दौर शुरू हो गया है. भारतीय किसान यूनियन की पंचायत हो या आरएलडी नेता जयंत चौधरी की महापंचायत, सभी में किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है. मौके की नजाकत को समझते हुए कांग्रेस ने भी पश्चिमी यूपी में अपनी सियासी जड़ें जमाने की कवायद शुरू कर दी है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को सहारनपुर के चिलकाना की किसान महापंचायत के जरिए पश्चिमी यूपी के समीकरण को साधने की कोशिश करेंगी. 

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चौधरी अजित सिंह के बेटे और आरएलडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी किसान महापंचायत के जरिए अपने खोए हुए राजनीतिक जनाधार को वापस लाने की लगातार कोशिश में जुटे हुए हैं. अभी तक जयंत चौधरी करीब आधा दर्जन महापंचायत कर चुके हैं और बीजेपी को किसान विरोधी कठघरे में खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं. यही वजह है कि कांग्रेस भी इस दिशा में सक्रिय हो गई है. हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने दिल्ली की ट्रैक्टर परेड में हादसे का शिकार हुए किसान नवरीत सिंह के परिवार से रामपुर में मुलाकात की थी और अब सहारनपुर से किसान महापंचायत का सिलसिला शुरू कर रही हैं. 
 

सहारनपुर में कांग्रेस सबसे ज्यादा मजबूत
यूपी में मौजूदा समय में कांग्रेस के सात विधायकों में से दो के बागी रुख अपनाने के बाद पार्टी के पास 5 विधायक बचे हैं. कांग्रेस के पांच विधायकों में से दो विधायक सहारनपुर जिले के हैं, जिनमें सहारनपुर देहात से मसूद अख्तर और बेहट से नरेश सैनी हैं. इतना ही नहीं, 2019 में सहारनपुर लोकसभा सीट पर भी कांग्रेस को करीब दो लाख 7 हजार वोट मिले थे. पश्चिमी यूपी में कांग्रेस सबसे ज्यादा मजबूत सहारनपुर जिले में मानी जाती है, जिसके चलते प्रियंका गांधी किसान पंचायत का आगाज यहीं से कर रही हैं. 

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दिल्ली से करीब पश्चिम यूपी
दिल्ली से सटे होने के नाते पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कांग्रेस के बड़े नेताओं का पहुंचना आसान है. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम यूपी के मेरठ, मुरादाबाद, रामपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद यहां तक कि मथुरा में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पश्चिमी यूपी का समीकरण बिगड़ गया है और यहां बीजेपी ने अपना सियासी आधार मजबूत किया है. इसके बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का कोई बड़ा नेता पार्टी छोड़कर नहीं गया है. 

मुस्लिमों का दिल जीतने की कोशिश
पश्चिमी यूपी में मुसलमानों की आबादी 30 से 40 फीसदी तक है. 2009 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया था. यहां की करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में है. ऐसे ही जाट समुदाय भी दो दर्जन सीटों पर जीतने और दो दर्जन सीटों पर दूसरे को जिताने की ताकत रखते हैं. 2013 के बाद जाट और मुस्लिमों के बीच दूरी होने का सियासी फायदा बीजेपी को मिला. सीएए आंदोलन के दौरान हुए प्रदर्शन के बाद कांग्रेस महासचिव ने पश्चिमी यूपी के तमाम जिलों में दौरा किया था और मुस्लिम समुदाय के लोगों से मिली थीं. 

पश्चिम यूपी की 126 सीटों में से बीजेपी ने 109 सीटें जीती थीं जबकि सपा 20, कांग्रेस दो, बसपा 3 सीट जीती थी और एक सीट आरएलडी को मिली थी. किसान आंदोलन के चलते एक बार फिर जाट-मुस्लिम सहित तमाम किसान जातियां एक साथ आ रही हैं और उनके बीच गहरी खाईं को पाटने के लिए गांव-गांव दोनों समुदाय के लोग पंचायत भी कर रहे हैं. जाटों-मुस्लिमों अपने पाले में लाने की कवायद में आरएलडी से लेकर कांग्रेस तक जुट गई हैं. 

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चुनाव का माहौल पश्चिम यूपी से ही बनता है
यूपी विधानसभा हो या लोकसभा हर चुनाव में यहीं से पहले चरण के चुनाव का माहौल तय होता है. इसीलिए सत्ताधारी पार्टी से लेकर विपक्षी पार्टियां पहले चरण में अपनी मजबूती बनाने के लिए पश्चिमी यूपी में पूरा दमखम लगाती हैं. ऐसे में माना जा रहा कि प्रियंका गांधी किसानों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए महापंचायत की सभाएं पश्चिम यूपी से शुरू कर रही हैं, जिसे यूपी के हर जिले की तहसीलों के बड़े गांवों से जय जवान-जय किसान के नाम से रैली की जाएगी. 

कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी में मजबूत जमीन करने के लिए कई बड़े नेताओं को कमान दी है. सहारनपुर में इमरान मसूद तो मुजफ्फरनगर में जाट समुदाय से आने वाले हरेंद्र मलिक और पंकज मलिक सक्रिय हैं. कांग्रेस इस अभियान से किसान जातियों खासकर हिन्दू-मुस्लिम जाटों और गुर्जरों में मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है. कांग्रेस ने इस अभियान के तहत उन जिलों को प्राथमिक तौर पर टारगेट किया है जहां पर मजबूत किसान राजनीति का आधार रहा है.

 

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