यूपी के लखीमपुर खीरी में किसानों और बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प का मामला जल्द थमता नहीं दिखाई दे रहा है. रविवार को जिले के तिकोनिया इलाके में हुई घटना में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई. मरने वालों में पत्रकार रमन कश्यप भी शामिल हैं. उनके पिता ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में दावा किया है कि उनके बेटे की मौत गाड़ी से कुचलने की वजह से हुई थी.
पत्रकार रमन कश्यप के पिता दाम दुलारे ने बताया कि मेरा बेटा कवरेज करने के लिए हादसे वाली जगह पर गया था और वहां उसकी मौत हो गई. उन्होंने कहा, ''मेरा बेटा भी गाड़ी की चपेट में आया. किसने गाड़ी चढ़ाई और किसकी गाड़ी थी, यह प्रशासन का काम है कि उन्हें बताना चाहिए कि किसकी गाड़ी से हादसा हुआ है. यह घटना तकरीबन पौने 4 बजे की है. ना तिकोनिया और ना ही निघासन में उसका इलाज किया गया. सीधे-सीधे लखीमपुर में उसके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया.''
उन्होंने दावा किया कि रात तीन बजे मुझे जानकारी मिली कि एक शव मॉर्चरी में पड़ा हुआ है, तब जाकर मैंने चार बजे देखा और फिर पहचाना कि यह शव मेरे बेटे का ही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर सही समय पर बेटे को इलाज मिल जाता तो उसकी मौत नहीं होती. साथ ही यदि पुलिस फोर्स वहां पर सही तरीके से तैनात की गई होती तो रविवार दोपहर को हई घटना रुक सकती थी.
रमन कश्यप के पिता ने आगे कहा, ''बॉडी पर जो निशान है, उससे पता चलता है कि उसे घसीटा गया था. सिर पर भी एक चोट का निशान है, जिसे देखकर लगता है कि उस पर चोट आई थी. हालांकि, अभी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट हमें नहीं मिल सकी है. हमारे पास बेटे के शव की फोटो है, जिससे पता चलता है कि घसीटने की वजह से उसकी मौत हुई है.
'रमन की मौत कोई हादसा नहीं, दर्दनाक तरीके से की गई हत्या'
वहीं, घटनास्थल पर मौजूद एक पत्रकार विनीत कुमार गुप्ता ने दावा किया कि रमन की मौत कोई हादसा नहीं थी, बल्कि उसकी दर्दनाक तरीके से हत्या की गई है. विनीत ने कहा, ''किसान अपना कार्यक्रम कर रहे थे. जो एक काले झंडे को दिखाना था, वह दिखा रहे थे, तभी बीजेपी की तीन गाड़ियां तिकोनिया से आ रही थीं और उनकी स्पीड काफी ज्यादा था. आगे एक थार गाड़ी थी. उसके पीछे फॉरच्यूनर थी. किसान प्रदर्शन कर रहे थे और उनके बीच में हमारा पत्रकार भाई था जब उसे ठोकर लगी तो वह गिर गया. इसके बाद पीछे चोट लगी और उसे घसीटते हुए निकल गए.''
उन्होंने आगे कहा कि जब यह घटना घटी तब सब लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन प्रशासन सिर्फ बीजेपी कार्यर्ताओं को बचाने में लगा हुआ था. उन्होंने मृतक के परिजन के लिए सरकारी नौकरी, बच्चे की परवरिश के लिए कम से कम 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है.