Lakhimpur Kheri Clash: लखीमपुर खीरी में जिन चार किसानों ने जान गंवाई उनके शवों को अबतक वहीं घटनास्थल पर रखा गया है. इस बीच किसान संगठनों ने कुछ मांगें रखी हैं, जिनको पूरा करने के लिए कहा गया है. फिलहाल मृतक किसानों के परिवारों और पुलिस प्रशासन के बीच बातचीत चल रही है. किसान नेता राकेश टिकैत भी इस मीटिंग का हिस्सा हैं.
बता दें कि लखीमपुर खीरी में रविवार को किसान प्रदर्शन के दौरान हुए हादसे और उसके बाद हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी. आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे ने उन किसानों पर कार चढ़ाई थी जिसके बाद हिंसा भड़क गई.
प्रशासन और मृतकों के परिवारों में बातचीत जारी
प्रदेश में हंगामे के बीच लखीमपुर खीरी में पुलिस प्रशासन और मृतक किसानों के बीच बातचीत जारी है. आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह मृतक किसानों के परिवारों से बात कर रही हैं. मीटिंग में किसान नेता राकेश टिकैत भी मौजूद हैं. घटनास्थल पर किसान शवों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं. शवों को वहां डीप-फ्रीजर में रखा गया है.
इससे पहले डीएम एके चौरसिया ने कहा था, 'मुझे किसानों से एक मेमोरेंडम मिला है. इसमें गृह राज्यमंत्री को हटाने, FIR दर्ज करने, मृतकों के परिवारवालों को मुआवजे और सरकारी नौकरी की बात है. इसके अलावा न्यायिक जांच की मांग की गई है. हम किसानों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे और फिर बातचीत करेंगे.'
चंद्रशेखर आजाद पहुंचे, कई नेता हिरासत में
लखीमपुर में किसानों की मौत के बाद विपक्षी पार्टियों के नेता वहां पहुंचना चाहते हैं. लेकिन लखीमपुर में फिलहाल भारी संख्या में पुलिसफोर्स तैनात है. अबतक मिली जानकारी के मुताबिक, राकेश टिकैत के अलावा भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद भी लखीमपुर पहुंच गए हैं.
दूसरी तरफ प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, संजय सिंह आदि को या तो रोक लिया गया या फिर उनको हिरासत में ले लिया गया. जयंत चौधरी भी फिलहाल लखीमपुर खीरी की तरफ बढ़ रहे हैं . छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और पंजाब क सीएम चरणजीत सिंह चन्नी भी लखीमपुर जाना चाहते हैं लेकिन अबतक उनके पहुंचने पर संशय है.
गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने दी सफाई
लखीमपुर हिंसा में बेटे का नाम आने पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने सफाई भी दी है. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ कुछ उपद्रवियों तत्वों ने गाड़ियों पर हमला किया था. हमले की वजह से गाड़ियां रुक गईं. उसके बाद उपद्रवियों गाड़ी में सवार कार्यकर्ताओं को बाहर खींचकर लाठी-डंडों और तलवारों से पीट-पीटकर उनकी हत्या की गई. फिर गाड़ियों को सड़क से नीचे धकेला गया और फिर जला दिया गया.