लखनऊ पोस्टर विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया. योगी सरकार ने पोस्टर हटाने के लिए और वक्त की मांग की है. मांग में कहा गया कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने लंबित है लिहाजा इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के पालन के लिए और वक्त की जरूरत है. अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी की तरफ से रिपोर्ट दाखिल की गई.
बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के होर्डिंग हटाने के आदेश पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि कोर्ट ने होर्डिंग्स पर कोई आदेश पारित नहीं किया है और कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच को सौंप दिया है. यूपी सरकार को होर्डिंग्स हटाने की जरूरत नहीं है.
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क्या है पूरा मामला
योगी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा मामले में आरोपियों पर कार्रवाई की थी. उनके खिलाफ लखनऊ के अलग-अलग चौराहों पर 100 वसूली पोस्टर लगाए गए थे. इन पोस्टरों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हटाने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक से इनकार कर दिया था.
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पोस्टर पर राजनीति
लखनऊ में योगी सरकार की ओर से लगाए गए वसूली पोस्टर के जवाब में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी पोस्टर लगाए. लखनऊ के अलग-अलग चौराहों पर वसूली पोस्टर के बगल में लगाए गए इस पोस्टर में यौन शोषण के आरोपी स्वामी चिन्मयानंद और रेप व हत्या के मामले में दोषी करार कुलदीप सिंह सेंगर की तस्वीर थी. पोस्टर पर शीर्षक लिखा था, 'ये हैं प्रदेश की बेटियों के आरोपी, इनसे रहें सावधान.'