मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में अब 22 अप्रैल को मथुरा कोर्ट सुनवाई करेगा. श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व की मांग को लेकर यह याचिका दाखिल की गई है. इस पर दूसरे पक्षकार का जवाब आने पर मथुरा कोर्ट में जज साधना रानी ठाकुर आगे सुनवाई करेंगी. याचिका में श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की भी मांग की गई है.
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से उनके अंतरंग सखा के तौर पर दायर याचिका में अदालत की निगरानी में विवादित जगह की खुदाई करने की मांग भी गई है. याचिकाकर्ता ने कहा कि खुदाई की एक जांच रिपोर्ट पेश की जाए. याचिका में दावा किया गया है कि जिस जगह पर औरंगजेब के शासनकाल में ईदगाह मस्जिद बनाई गई थी, उसी जगह पर वो पौराणिक और ऐतिहासिक कारागार मौजूद है जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. सदियों तक उसे केशव देव जी का टीला नाम से जाना जाता रहा. उस टीले की खुदाई कराई जाए तो यह सत्य तथ्य सामने आ जाएगा और बात साबित हो जाएगी.
दावा खारिज करने की मांग
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में प्रतिवादी इंतजामिया शाही मस्जिद कमेटी ने ठाकुर केशवदेव महाराज के दावे को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि यह दावा संसद से पारित पूजा स्थल अधिनियम 1991 के खिलाफ है लिहाजा इसे खारिज किया जाए. इस मामले से जुड़े पक्षकार श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति ने कहा है कि उक्त एक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है.
समिति के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत में दावा किया कि शाही मस्जिद ईदगाह को इसी जमीन पर मंदिर को तोड़कर बनाया गया था. प्रतिवादी पक्षों में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद के सचिव के अलावा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव शामिल हैं.
केंद्र सरकार को नोटिस
महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही मस्जिद के सचिव व यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन पर आरोप लगाया गया था कि वह मस्जिद में लगे उन पत्थरों को हटाने का प्रयास कर रहे हैं जो कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाते समय लगाए गए थे. इसे लेकर उनके द्वारा अदालत में अमीन कमीशन की रिपोर्ट, स्टे, रिसीवर आदि की मांग की गई थी.
समिति के अध्यक्ष ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 को सुप्रीम कोर्ट में इस आधार पर चुनौती दी गई है कि धार्मिक स्थलों के रखरखाव नियमन और कानून व्यवस्था बनाए रखने आदि का अधिकार संविधान ने राज्य सरकार को दिया है. तो केंद्र सरकार इस पर कानून किस अधिकार से बना सकती है? लिहाजा तब की नरसिंह राव सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ये कानून बनाया. इस याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया है.