उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. बिहार की सियासी पिच पर बीजेपी के सहारे अपनी जगह बनाने वाले विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी यूपी की राजनीति में किस्मत आजमाने जा रहे हैं. मुकेश सहनी शुक्रवार को लखनऊ में कार्यक्रम कर यूपी चुनाव में उतरने का ऐलान करेंगे.
बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश के अखबारों में फुल पेज विज्ञापन के जरिए अपना राजनीतिक एजेंडा भी साफ कर दिया है कि 'आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं'. वो निषाद समाज के आरक्षण को लेकर मुखर हैं. यूपी में बीजेपी की सहयोगी निषाद पार्टी भी निषाद समुदाय के आरक्षण की मांग लगातार उठा रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर पिछले दिनों सहनी ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात भी की थी.
बता दें कि वीआईपी बिहार में एनडीए गठबंधन में है. लेकिन उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ेगी. बिहार में वीआईपी 3 साल पुरानी पार्टी है और अभी उसके चार विधायक और 1 एमएलसी हैं. मुकेश सहनी पार्टी मुखिया के साथ बिहार सरकार में पशु एवम मत्स्य संसाधन मंत्री हैं. मुकेश सहनी निषादों के लिए अलग से आरक्षण चाहते हैं.
यूपी में 6 फीसदी निषाद समुदाय की आबादी है, लेकिन मुकेश सहनी कहते हैं कि निषाद की उपजातियों को मिलाकर कुल आबादी के 14 प्रतिशत है. मुकेश सहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 150 सीटें ऐसी हैं, जहां उनकी पार्टी चुनाव लड़ सकती है. इसी कड़ी में वो यूपी में अपनी पार्टी को लांच कर रहे हैं. निषाद समुदाय के बीच अपनी जगह बनाने के लिए मुकेश सहनी 25 जुलाई को दस्यु फूलन देवी की याद में समारोह का आयोजन करेंगे, जो उत्तर प्रदेश के हर जिले में मनाया जाएगा.
फूलन देवी की 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में हत्या हुई थी. मुख्य समारोह गोरखपुर में मनाया जाएगा, यहां निषाद समुदाय की अच्छी खासी संख्या है. इससे पहले भी मुकेश सहनी गोरखपुर में निषाद समुदाय का सम्मलेन कर चुके हैं. इसी गोरखपुर से निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद भी हैं, जिनके बेटे बीजेपी से मौजूदा समय सांसद हैं. संजय निषाद लगातार बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटे और अब मुकेश सहनी भी दस्तक देने जा रहे हैं.
मुकेश सहनी का राजनैतिक जीवन बहुत पुराना नहीं है. 2014 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अगले साल से वे राजनीति में सक्रिय रूप से काम करने लगे. 2015 के विधानसभा चुनाव में वे बीजेपी के साथ थे, लेकिन उसके बाद महागठबंधन में शामिल हो गए और 2018 में विकासशील इंसान पार्टी बनाई. 2019 का लोकसभा चुनाव महागठबंधन से लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली.
2020 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन के प्रेस कॉन्फ्रेंस से वॉकआउट कर एनडीए में शामिल हुए. बीजेपी ने उन्हें 11 सीट दी, जिनमें 4 सीटो पर मुकेश सहनी की पार्टी ने सफलता पाई, लेकिन वह खुद चुनाव हार गए. बाद में उन्हें मंत्री बनाकर एमएलसी बनाया गया. वहीं, अब यूपी में भी चुनावी किस्मत आजमाने के मूड में है.
बता दें कि मुकेश सहनी से पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी यूपी चुनाव में ताल ठोंकने का एलान कर दिया है. यूपी में 2022 की शुरूआत में विधानसभा चुनाव होने है, जिसे लेकर जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा था कि ''उत्तर प्रदेश में हम पहले भी एनडीए का हिस्सा रहे हैं. वहां हमारे, विधायक, सांसद और मंत्री रहे हैं. 2017 के चुनाव में भी हम पूरी तरह से तैयार थे. लेकिन पार्टी में सर्वसहमति के बाद हमने न लड़ने का निर्णय लिया, जिसका फायदा बीजेपी को मिला.'
त्यागी ने कहा कि ''मैंने योगी आदित्यनाथ से बात की है. उनसे कहा कि नीतीश कुमार की पिछड़े समाज में पॉपुलैरिटी का इस्तेमाल यूपी में भी किया जा सकता है. केसी त्यागी ने कहा कि ''हमारी पार्टी ने अब विस्तार का फैसला किया है. अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी से बात नहीं बनती तो हम अकेले चुनाव में जा सकते हैं. बिहार में एनडीए का हिस्सा रहते हुए हम पहले भी पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में बीजेपी से अलग चुनाव लड़ चुके हैं.