इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आपराधिक मामले में माफिया मुख्तार अंसारी को दोषी करार दिया है. कोर्ट ने मुख्तार को तीन अलग-अलग धाराओं के तहत अधिकतम 7 साल की सजा सुनाई गई है.
इस मामले में तत्कालीन जेलर रहे एसके अवस्थी ने पुराना किस्सा बताया. उन्होंने कहा, "साल 2003 में लखनऊ जेल में बंद रहे तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी से मिलने के लिए कुछ लोग असलाहों से लैस होकर जेल पहुंचे थे. तब मैंने उनकी तलाशी लेनी चाही, तो मुख्तार अंसारी ने इस पर एतराज जताया."
उन्होंने आगे बताया, "बात इतनी बढ़ गई कि मुख्तार अंसारी ने मुलाकाती की पिस्टल निकाल कर मुझ पर तान दी. इतना ही नहीं जान से मारने की धमकी भी दी. जेलकर्मियों ने भी धमकी दिए जाने की बात बताई थी." मामले में जेलर ने लखनऊ के आलमबाग थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी.
गवाही में मुकर गए थे जेलकर्मी
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने मुख्तार को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सरकार ने अपील दाखिल की थी. आज तक से बातचीत में एसके अवस्थी बताते हैं "इस केस में कोर्ट में पहली बार गवाही, मेरे रिटायरमेंट के 1 साल बाद 2014 को हुई."
उन्होंने आगे कहा, "कोर्ट में इस केस में जब गवाही की बारी आई, तो मेरी ही जेल के अन्य जेलकर्मी मुकर गए. इसकी वजह से केस लोअर कोर्ट से छूट गया था. मगर, सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट में पैरवी की. इसी का जिसका नतीजा है कि मुख्तार अंसारी को 7 साल की सजा हुई."
गौरतलब है कि मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोपी अंसारी को आईपीसी की धारा 353 के तहत 2 साल सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना, धारा 504 के तहत 2 साल की सजा और 2 हजार रुपये का जुर्माना और धारा 506 के तहत सात साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया.