यूपी में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद अखिलेश यादव सरकार की परेशानियां कम होने बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. पिछली 10 सितंबर को सुभाष चंद्र दुबे की जगह मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर तैनात होने वाले प्रवीण कुमार गुरुवार, 26 सितंबर को अचानक आंख के लाल हो जाने से नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती हो गए.
प्रवीण कुमार का अचानक ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाने से हुई आंख में तकलीफ की असल वजह मुजफ्फरनगर में हिंसा के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप से पैदा हुए तनाव को माना जा रहा है. मुजफ्फरनगर के एसएसपी के तौर पर कामकाज संभालते ही प्रवीण कुमार दंगा प्रभावित इलाकों की असलियत से वाकिफ हो गए थे.
यही कारण था कि उन्होंने अखिलेश यादव सरकार से पहले मुजफ्फरनगर के कवाल गांव की घटना की सीबीआई या सीबीसीआईडी जांच कराने की सिफारिश कर दी थी. शासन को भेजी गई रिपोर्ट में एसएसपी ने दंगे में हुई फर्जी नामजदगियों को भी इंगित किया था. शासन के मनमुताबिक रिपोर्ट न भेजने की वजह से वह लखनऊ में बैठे बड़े अधिकारियों को खटकने लगे थे.
कुमार की सिफारिश पर शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और उनकी परेशानियों को नजरंदाज करते हुए अधिकारियों ने मुकदमे में दर्ज कई आरोपियों पर तेजी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (रासुका) के तहत कार्रवाई करवाने का दबाव बनाया हुआ था. लखनऊ में पुलिस मुख्यालय में तैनात एक आईजी स्तर के अधिकारी बताते हैं कि ऊपरी दबाव की वजह से ही एसएसपी प्रवीण कुमार को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो गई है और उन्हें 'मेडिकल लीव' पर जाना पड़ा है.
हालांकि विभागीय सूत्र कि प्रवीण कुमार को 'फोर्स लीव' पर भेजा गया है. ब्लड प्रेशर बढऩे की वजह से आंख लाल होना इतनी बड़ी बीमारी नहीं है, जिसमें एम्स जैसे अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़े. जानकारी के मुताबिक शासन के अधिकारी मुजफ्फरनगर में नए एसएसपी तैनात करने की कवायद में जुट गए हैं.