
सूचना विभाग के सोशल मीडिया सेल का काम देख रही निजी कंपनी के कर्मचारी पार्थ श्रीवास्तव की मौत का मामला गरमाता जा रहा है. 22 मई को आत्महत्या करने वाले पार्थ ने एक सुसाइड नोट के जरिए अपने सीनियर पुष्पेंद्र सिंह पर कई आरोप लगाए थे.
कहा गया था कि पुष्पेंद्र, शैलजा नाम की कर्मचारी को ज्यादा तवज्जों दे रहे थे. अब इस मामले में सीबीआई जांज की मांग होने लगी है. इस सिलसिले में सीएम योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी लिखी गई है.
पार्थ श्रीवास्तव सुसाइड केस में सीबीआई जांच की मांग
वाराणसी स्नातक सीट से एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि पार्थ श्रीवास्तव सुसाइड केस को सीबीआई को सौंप दिया जाए. आशुतोष सिन्हा ने लिखा है कि वरिष्ठ सहकर्मियों के मानसिक दोहन के चलते ही पार्थ ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया जिससे विभाग और सरकार की छवि धूमिल हुई है.
पत्र के जरिए मांग की गई है कि पार्थ श्रीवास्तव सुसाइड केस में नामजद आरोपियों को ना सिर्फ सेवा से बर्खास्त किया जाए बल्कि उनकी गिरफ्तारी भी सुनिश्चित कराई जाए. अपील तो ये भी कर दी गई है कि परिवार को सुरक्षा देते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जाए.
पुष्पेंद्र सिंह की तलाश में पुलिस
वहीं दूसरी तरफ इस मामले की तफ्तीश कर रही इंदिरानगर पुलिस ने पुष्पेंद्र की तलाश के लिए उसके मोबाइल की कॉल डिटेल मंगाई है. वहीं दूसरी तरफ आत्महत्या से पहले पार्थ ने जिन करीबी दोस्तों से फोन पर या व्हाट्सएप के जरिए बात की उनसे भी पुलिस बयान दर्ज कर रही है. फिलहाल इंदिरा नगर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद नामजद दोनों आरोपी, पुष्पेंद्र सिंह और शैलजा पुलिस के रडार पर हैं. शैलजा से कोविड ग्रसित होने के चलते पुलिस पूछताछ नहीं कर पा रही है लेकिन पुष्पेंद्र सिंह की तलाश की जा रही है.
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पार्थ की चैटिंग से खुलेंगे कई राज
अब केस की सीबीआई जांच की मांग जरूर उठाई जा रही है, लेकिन पार्थ का परिवार अभी भी इसी सदमे में है कि उनका बच्चा सुसाइड कैसे कर सकता है. परिवार को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि पार्थ ऐसा कोई कदम उठा सकता था. वैसे भी सुसाइड से पहले पार्थ की तरफ से कई दोस्तों संग चैटिंग की गई थी. ऐसे में पुलिस उस चैटिंग के जरिए केस से जुड़े कई राज जानने का प्रयास कर रही है. अभी के लिए पुलिस को यहीं उम्मीद है कि पुष्पेंद्र सिंह और शैलजा के जरिए इस केस को सुलझाया जाएगा.
(रिपोर्ट- संतोष कुमार शर्मा)