उत्तर प्रदेश में कोयले की कमी से बिजली संकट बढ़ता जा रहा है. कोयले की कमी की वजह से करीब 2000 मेगावाट क्षमता की इकाइयां बंद करनी पड़ीं. ऐसे में उत्तर प्रदेश में बिजली की कटौती भी की जा रही है. हालांकि, उत्तर प्रदेश के बिजली मंत्री का कहना है कि वे केंद्र सरकार पर निर्भर हैं. हालांकि, उन्होंने ज्यादा कुछ कहने से मना कर दिया.
जानकारी के मुताबिक , उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 17000 मेगावाट है, जबकि मौजूदा समय में 15000 मेगावाट के आसपास बिजली उपलब्ध है, जबकि कोयले की कमी से 3000 मेगावाट बिजली इस समय उत्पादित हो पा रही है. ऐसे में 1000 से 1500 मेगावाट तक की कटौती की जा रही है, जिसकी वजह कोयले की कमी माना जा रहा है.
ये इकाइयां हुईं बंद
कोयले की कमी से रोजा, ऊंचाहार , पारीछा हरदुआगंज, ललितपुर की एक एक इकाई को बंद करना पड़ा है. हालांकि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, राज्य केंद्र सरकार पर निर्भर हैं और जल्दी इसका निस्तारण किया जाएगा. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि राज्य में बिजली की कमी कोयले की आपूर्ति बाधित होने के चलते हुई है. उन्होंने इसके लिए जनता के सामने खेद जताया. उन्होंने आश्वासन दिया कि समस्या जल्दी खत्म हो जाएगी.
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर के डायरेक्टर अश्विनी श्रीवास्तव के मुताबिक, कोयले के फ्लो में कमी की वजह से पावर स्टेशन बंद हो गए हैं, ऐसे में बिजली की आपूर्ति कम हुई है. उन्होंने कहा, 2 हजार मेगावाट की इकाइयां बंद हैं. अभी 100 और 80 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट चल रहे हैं. जबकि कोयले के लिए यूपी पूरी तरह केंद्र पर निर्भर है. बाकी एंटीपिसी समेत अन्य जगह से लिया जा रहा है. 20 हजार मेगावाट की कमी है.
जनता में बिजली कटौती को लेकर गुस्सा
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले पर बोलने से इंकार किया और पूरी समस्या के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर होने की बात कही है. उन्होंने कहा, इस मुद्दे पर केंद्र के साथ संपर्क में हैं. उधर, नवरात्रि और त्यौहारों के वक्त रात में बिजली कटौती पर जनता में भी काफी रोष है. जनता दिन में बिजली कटौती करने की भी मांग कर रही है.