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यूपी: सरकार पर बरसे नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा में कहा 'कफन चोर'

लखनऊ विधानसभा में विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक बार भी इस बजट पर कुछ नहीं बोला. पिछला अनुपूरक बजट ही सरकार खर्च नहीं कर पाई, ऐसे में नए बजट की आवश्कता नहीं है. हमें लगता है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है. 

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लखनऊ विधान सभा में विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी
लखनऊ विधान सभा में विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिछला अनुपूरक बजट ही सरकार खर्च नहीं कर पाई - चौधरी
  • नए बजट की आवश्कता नहीं है - चौधरी

लखनऊ विधानसभा में शुक्रवार को अनुपुरक बजट पर चर्चा की जा रही थी. इसमें विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी अनुपुरक बजट पर अपने विचार रख रहे थे. राम गोविंद चौधरी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अनुपुरक बजट की कोई ज़रूरत ही नहीं थी.

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राम गोविंद चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक बार भी इस बजट पर कुछ नहीं बोला. पिछला अनुपूरक बजट ही सरकार खर्च नहीं कर पाई, ऐसे में नए बजट की आवश्कता नहीं है. बार-बार अनुपूरक बजट लेने का कोई औचित्य नहीं है. हमें लगता है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है. 

अनुपुरक बजट की कोई ज़रूरत ही नहीं थी

संविधान के अनुच्छेद-205 का हवाला देते हुए राम गोविंद चौधरी ने कहा कि किसी विशिष्ट सेवा पर प्राधिकृत कोई रकम अपर्याप्त पाई जाती है और अगर नई सेवा की आवश्यकता पैदा हो गई हो, तो अनुपूरक प्रस्तुत करने का प्रावधान है. लेकिन इस बजट में विशिष्ट सेवा का कोई उल्लेख ही नहीं है. न ही किसी पूर्वअनुमानित सेवा का उल्लेख है, ऐसे में इस बजट से यह पता चलता है कि इस सरकार के पास कई ठोस नीति ही नहीं है. जब पुराना पैसा ही खर्च नहीं हुआ, तो सदन बार-बार पैसा क्यों पास करे. यह सरकार जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है. 

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सरकार ने बजट को सही से खर्च ही नहीं किया. ये सरकार फेल है. सरकार जनहित के काम पर पैसा खर्च नहीं कर सकी. किसान आज परेशान है, बिजली व्यवस्था खराब है. किसानों को मंहगी बिजली मिल रही.

कोरोना पर सरकार को कफन चोर कहा

राम गोविंद चौधरी ने कहा कि पिछले पांच सालों से मुख्यमंत्री एक ही भाषण दे रहे हैं, कोरोना को लेकर तीन बार से एक ही बात कह रहे हैं. दूसरे देशों से तुलना कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने घर को तो देखना चाहिए. उत्तरप्रदेश में जितने लोग पिछले साल कोरोना में मरे, उतने कहीं नहीं मरे होंगे. शहर-शहर, गांव-गांव श्मसान बन गए, और जब जगह नहीं बची तो लोगों ने शव नदी में बहा दिए. ये खबरें जब चैनलों पर चलने लगीं, तो सरकार ने निर्दयिता से शवों से कफन उतरवा दिए. यह सरकार, कफन चोर है.

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