ग्रेटर नोएडा, नोएडा वेस्ट और नोएडा एक्सटेंशन में हजारों फ्लैट तैयार हो रहे हैं, इस में से अधिकतर तो नामी बिल्डर्स के हैं, लेकिन जैसे ही आप किसी गांव में प्रवेश करेंगे तो अब आपको ऊंची ऊंची इमारतें नजर आएंगी यह इमारतें हैं जिन्हें या तो जमीन का मालिक या फिर कोई बिल्डर बगैर किसी मानक के बनाकर बेच देता है.
नोएडा से नोएडा एक्सटेंशन की ओर बढ़ते ही आपको दोनों तरफ कई किलोमीटर डूब क्षेत्र नजर आएगा यह वह इलाका है जो नदी के करीब होता है और जहां पर निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित है. लेकिन इस रेतीली मिट्टी में भी हजारों घर अवैध रूप से बने नजर आ रहे हैं. जहां पर नोएडा अथॉरिटी का बड़ा सा बोर्ड लगा है जिसमें साफ लिखा है कि इस इलाके में किसी भी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है.
वहीं दूसरी ओर नोएडा सेक्टर 121 के करीब गढ़ी चौखंडी गांव में ऊंची-ऊंची इमारत नजर आती हैं जो मानकों को ताक पर रखकर बनाई गई थी. यहां बिल्डिंग एक दूसरे के बिल्कुल करीब आड़ी-तिरछी बनी हुई है. कुछ निर्माणाधीन बिल्डिंग के तो पिलर भी तिरछे हैं.
दरअसल नोएडा और ग्रेटर नोएडा के ज्यादातर गांव में तेजी से फ्लैट कल्चर विकसित हो रहा है यही वजह है कि लोगों ने अपने खेतों में फ्लैट बना बना कर बेचना शुरू कर दिया है. इस मसले पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फ्लैट बायर्स की लड़ाई लड़ने वाले अनु खान कहते हैं कि प्राधिकरण और पुलिस की मिलीभगत से सरकारी जमीन से लेकर नदी के किनारे पड़ने वाली डूब क्षेत्र की जमीन तक में लोगों ने प्लॉट काट दिए हैं और वहां पर फ्लैट बनाकर आम जनता को बेचा जा रहा है. लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है कि जो फ्लैट वह खरीद रहे हैं, वे गैर कानूनी जमीन पर बने हैं. लेकिन सस्ता होने की वजह से अधिकतर लोग इनके चंगुल में फस जाते हैं.
शाहबेरी गांव में हर दूसरी बिल्डिंग 6 मंजिला !
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी गांव में बिल्डिंग गिरने से कई लोगों की मौत हो गई लेकिन इस गांव में जहां भी नजर डालेंगे चारों तरफ ऊंची-ऊंची 6 मंजिला इमारत आपको नजर आएंगी. जानकार बताते हैं गांव में निर्माण कार्य पर रोक है बावजूद इसके धड़ल्ले से ऊंची इमारतें बन रही हैं और फिर उन्हें फ्लैट के आधार पर बेच दिया जाता है.
अब सवाल उठता है, क्या सभी बिल्डिंग मानकों के अनुसार बन रही हैं ? ऐसा कतई नहीं लगता क्योंकि एक 6 मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग में जब हम पहुंचे तो हमें घटिया क्वालिटी का निर्माण दिखा. इतनी ऊंची इमारत बावजूद इसके निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री घटिया क्वालिटी की नजर आई. बिल्डिंग के बेसमेंट में जहां तहां पानी भरा था तो वहीं सरिया बेहद कमजोर क्वालिटी की थी.