अगर आपने अपने परिजनों के खिलाफ जाकर अपनी मर्जी से शादी कर ली है और आपको अपनी जान का खतरा सता रहा है, तो आप सुरक्षा ले सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि हर नागरिक की जीवन की रक्षा करना सरकार का दायित्व है. जहां तक शादी की बात है, तो 18 साल की उम्र पूरी कर चुकी लड़की और 21 साल की उम्र पूरी कर चुका लड़का अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं. इसमें जाति कोई बाधा नहीं बनती है. कानून इसकी पूरी इजाजत देता है.
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि अगर कोई अपने परिजनों के खिलाफ जाकर शादी करता है और उसको अपनी और अपने जीवन साथी की जान का खतरा है, तो वह इलाके के पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की मांग कर सकता है. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस सुरक्षा देने से मना करती है, तो ऐसे नवदंपति संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सीधे हाईकोर्ट और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं.
एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट और अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामले को सुनने के लिए बाध्य है. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को जीवन जीने का मौलिक अधिकार मिला है. अगर उसके इस मौलिक अधिकार का हनन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट इसकी रक्षा करने के लिए बाध्य है.
उन्होंने बताया कि अगर कोई नवदंपति अपनी जान को खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट जाता है, तो न्यायालय पुलिस और सरकार को आदेश दे सकते हैं कि नवदंपति को सुरक्षा मुहैया कराई जाए. अदालत के आदेश के बाद पुलिस को नवदंपति को सुरक्षा मुहैया करानी ही होगी. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बरेली के बीजेपी विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी ने परिवार के खिलाफ जाकर अपनी मर्जी से दलित समाज के अजितेश कुमार से शादी कर ली है. इसके बाद से साक्षी और उनके पति अजितेश कुमार अपनी जान को खतरा बता रहे हैं.
आजतक से खास बातचीत में दोनों ने कहा कि उनका पीछा किया जा रहा है और उनको जान का खतरा है. साक्षी ने बताया कि जब हमने बरेली के पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा देने की गुहार लगाई, तो उन्होंने साफ मना कर दिया. साथ ही कहा कि वो कोर्ट के आदेश के बिना किसी तरह की सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते हैं. इसके बाद साक्षी और उनके पति अजितेश कुमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की है.