समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति चुनाव में यशवंत सिन्हा को समर्थन दिया था और उनके पक्ष में वोटिंग के लिए सपा ने व्हिप भी जारी कर रखा था. इसके बाद भी सपा न तो अपने सहयोगी दल को साथ रख पाई और न ही अपने विधायकों को क्रॉस वोटिंग करने से रोक पाई. शिवपाल यादव और सहयोगी सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से अखिलेश ने किनारा तो कर लिया, लेकिन क्रॉस वोटिंग करने वाले अपने विधायकों के खिलाफ एक्शन लेने से वो क्यों बच रहे हैं?
राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में बड़ी संख्या में क्रॉस वोटिंग की थी. इन क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों में सपा के आधा दर्जन विधायक के भी शामिल होने की बात सामने आई थी. हालांकि, सपा ने अपने विधायक के लिए व्हिप भी जारी कर रखी थी, इसके बाद भी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर शिवपाल यादव समेत सपा के पांच विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट किया था.
अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते शिवपाल यादव को तो पार्टी से आजाद कर दिया है, लेकिन बाकी अन्य विधायकों पर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है जबकि पार्टी ने इन विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात उसी समय कही थी.
क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के लिए पार्टी ने एक आंतरिक रिपोर्ट तैयार की है. आंतरिक रिपोर्ट में सपा के केवल चार विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने की संभावना जताई गई है. पांचवां क्रॉस वोट विपक्ष के एक दूसरे दल के विधायक के करने की संभावना है. इसके बाद भी सपा अपने विधायकों के खिलाफ एक्शन लेने में हिचक रही है, क्योंकि पार्टी मौजूदा समय में कई मोर्चों पर घिरी हुई है. इसीलिए अखिलेश यादव फिलहाल कोई ऐसा कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे कहीं सियासी दांव उल्टा न पड़े जाए.
सहयोगी दल छोड़ रहे साथ
अखिलेश यादव फिलहाल अपने विधायकों से इसीलिए बच रहे हैं क्योंकि सपा के कई सहयोगी दल साथ छोड़कर चले गए हैं. महान दल, सुभासपा और शिवपाल यादव की पार्टी सपा गठबंधन से अलग हो चुकी हैं, जिससे पार्टी पहले से बैकफुट पर है. ऐसे में अखिलेश यादव अगर अपने विधायक के खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं तो सियासी माहौल और भी खिलाफ हो सकता है. इसीलिए क्रॉस वोटिंग करने वालों पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं.
शक के आधार पर एक्शन से बच रही पार्टी
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान गुप्त होता है. ऐसे में सपा के किन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है, उन पर शक ही है. ऐसे में महज शक आधार पर एक्शन लेना पार्टी उचित नहीं मान रही. क्रॉस वोटिंग के लिए जब तक पार्टी सौ प्रतिशत पक्का नहीं हो जाती है तब तक किसी पर एक्शन नहीं लेना चाहती.
हालांकि, बरेली में पेट्रोल पंप पर बुलडोजर चलने के कारण चर्चा में आए सपा के विधायक शहजील इस्लाम की ओर से भी क्रॉस वोट करने की आशंका जताई गई थी. शहजिल इस्लाम मतदान से पहले और मतदान के बाद भी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में समर्थन करने वाले शिवपाल यादव के साथ खड़े नजर आए थे. ऐसे में शहजिल इस्लाम का क्रॉस वोटिंग के लिए पक्का माना जा रहा, लेकिन अन्य विधायकों के लेकर तस्वीर साफ नहीं है.
बगावत से बचना चाहती है सपा
राष्ट्रपति चुनाव में यशवंत सिन्हा के हार जीत से सपा पर कोई सियासी प्रभाव नहीं पड़ना था. ऐसे में माना जा रहा है कि सपा इसीलिए क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर एक्शन लेकर उन्हें नाराज नहीं करना चाहती, क्योंकि विधानसभा चुनाव के तीन महीने में ही अगर विधायक के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे तो उसके संदेश भी गलत जाएंगे. इससे पार्टी को भी नुकसान होगा और वो खुलकर बगावती तेवर अख्तियार कर लेंगे, जिस तरह से इन दिनों शिवपाल यादव आक्रमक हैं और लगातार अखिलेश यादव के घेर रहे हैं.
अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव के खिलाफ एक्शन लेकर आजाद तो जरूर किया है, लेकिन पूरी तरह नहीं. शिवपाल अभी पार्टी लाइन से बंधे हैं और अगर सपा छोड़कर दूसरी पार्टी में जाते हैं तो उनकी सदस्यता खत्म हो जाएगी. इस तरह अखिलेश ने क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को एक संदेश जरूर दिया है, लेकिन एक्शन लेने से बचे हैं ताकि भविष्य में उन्हें साधकर रखा जा सके.