उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की आज (26 मार्च) पार्टी दफ्तर में बैठक चल रही है. इस बैठक में शामिल होने के लिए सुबह से हलचल शुरू हो गई थी, लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि विधायक दल की बैठक में शिवपाल यादव को नहीं बुलाया गया. शिवपाल को इस बैठक के लिए न्योता ही नहीं दिया गया था.
आजतक से बातचीत में शिवपाल यादव ने कहा कि वो लखनऊ में 2 दिन से इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया गया. मैं समाजवादी पार्टी से न सिर्फ MLA हूं बल्कि पार्टी के सक्रिय सदस्य हूं. आगे आप क्या करेंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वो अपने समर्थकों और जनता से बात करके फैसला करेंगे. समाजवादी पार्टी में रहेंगे या बीजेपी के साथ जाएंगे, इस पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. बता दें कि अखिलेश यादव ने 28 अप्रैल को अन्य दलों के नेताओ को बुलाया है. उसी बैठक में शिवपाल सिंह यादव भी होंगे.
बता दें कि जब चुनाव परिणाम सामने आए थे तो कयास लगाए जा रहे थे कि अखिलेश उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं, कहा जा रहा था कि शिवपाल यादव को सदन में विधायक दल का नेता बनाया जा सकता है. लेकिन शनिवार को लखनऊ में होने वाली बैठक में शिवपाल को निमंत्रण न देना अपने आप में सवाल खड़ा करने वाला है.
वहीं आज विधायक दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है. साथ ही विधायक दल का नया नेता भी चुना जा सकता है. रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और पूर्व मंत्री मनोज पांडे ने आज तक को बताया बैठक में आगे की रणनीति तैयार होगी. लिहाजा विधान परिषद के चुनाव के लिए भी बैठक में रणनीति बनाई जाएगी.
बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव करहल विधानसभा से चुनाव जीते हैं. उन्होंने आजमगढ़ से सांसद के पद से इस्तीफ़ा देकर विधायक बने रहना चुना है. मतलब साफ है कि समाजवादी पार्टी (सपा) भले ही सूबे की सत्ता में वापसी न कर पाई हो, लेकिन विधायकों की संख्या बढ़कर सौ के पार हो गई है. ऐसे में मुख्य विपक्षी दल सपा ही है.
समाजवादी पार्टी में नेता प्रतिपक्ष चुनने और नेता सदन चुनने के लिए सभी विधायकों के साथ मीटिंग चल रही है. बैठक में रामकांत यादव, रविदास मल्होत्रा, माता प्रसाद पांडेय समेत सभी चुने हुए विधायक मौजूद हैं.