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योगी सरकार के चार साल, अपराध नियंत्रण के अलावा निवेश पर रहा फोकस

सरकारी आंकड़ों की बात करें तो मई 2017 से लेकर जनवरी 2021 तक उत्तर प्रदेश में 1 लाख 88 हजार करोड़ रुपये करोड़ से अधिक का निवेश अलग-अलग क्षेत्रों में हुआ. निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने कम से कम एक दर्जन से अधिक विभागों में योजना के मुताबिक बदलाव किए.

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटोः पीटीआई)
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटोः पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी इन्वेस्टमेंट समिट के आयोजन से हुआ लाभ
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी रहा प्रदेश सरकार का जोर

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के चार साल पूरे हो चुके हैं. चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर सरकार की ओर हर जिले में अपनी उपलब्धियां आम जनता तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. सीएम योगी ने भी अपनी उपलब्धियों का बखान किया. अगर यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों के बारे में बात की जाए तो सरकार ने अपराध नियंत्रण के अलावा अगर किसी चीज पर सबसे ज्यादा फोकस किया तो वह है निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट.

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यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद साल 2017 में इन्वेस्ट यूपी प्रोग्राम शुरू हुआ. इसके अच्छे परिणाम आए हैं. सरकारी आंकड़ों की बात करें तो मई 2017 से लेकर जनवरी 2021 तक उत्तर प्रदेश में 1 लाख 88 हजार करोड़ रुपये करोड़ से अधिक का निवेश अलग-अलग क्षेत्रों में हुआ. निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने कम से कम एक दर्जन से अधिक विभागों में योजना के मुताबिक बदलाव किए. सत्ता में आने के बाद साढ़े तीन साल के अंदर विभागों में 186 रिफॉर्म्स किए गए. इसकी वजह से शुरुआत में ही 156 कंपनियों की तरफ से 48707 करोड़ रुपये का उत्पादन संबंधी निवेश हुआ.

सरकार का दावा है कि इसकी वजह से प्रदेश में पहले ही साल इन्वेस्ट यूपी के तहत 21 कंपनियों ने 10 हजार करोड़ रुपये और उसके बाद 30 कंपनियों ने 32 हजार करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में निवेश किया. जिन कंपनियों ने शुरुआत में निवेश किया उनमें से स्पर्श इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने 600 करोड़ रुपये, रिमझिम इस्पात ने 550 करोड़ रुपये का निवेश किया. इन दोनों कंपनियों ने मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में निवेश किया था. इसके अलावा केंट आरओ सिस्टम ने 300 करोड़ रुपये नोएडा में और पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 205 करोड़ रुपये लखनऊ में निवेश किए. लखनऊ से सटे बाराबंकी में एमएम फोर्जिंग ने 150 करोड़ रुपये का निवेश किया.

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पिछले 4 सालों में जिन बड़ी कंपनियों ने यूपी में निवेश किया, उनमें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, वीवो मोबाइल्स, ओप्पो मोबाइल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हालिटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सनव्वोदा इलेक्ट्रॉनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सैमसंग इंडिया शामिल हैं. निवेश के मामले में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भी करीब 6300 करोड़ रुपये निवेश किए गए. इसके बाद सरकार ने ‘वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट’ स्कीम शुरू की. सरकार का दावा है कि ओडीओपी स्कीम के चलते प्रदेश का एक्सपोर्ट 32 फीसदी बढ़ा और इसे केंद्र सरकार ने भी सराहा और केंद्रीय बजट में इस साल इसे जगह दी गई. निवेश को ज्यादा बढ़ाने के लिए और उद्योग स्थापित करने के लिए एमएसएमई योजना शुरू की गई, जिसके चलते छोटे उद्योग और निवेश करने वाले हजारों लोगों को वित्तीय मदद और पूरा सहयोग दिया गया.

यूपी में निवेश को लेकर के सबसे ज्यादा उत्साह आईटी सेक्टर में देखने को मिला. मोबाइल कंपनियां, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई. पहले साल के इन्वेस्टमेंट समिट में शुरुआती इन्वेस्टमेंट जो कि लगभग 60,000 करोड़ रुपये का था, उसमें अकेले आईटी कंपनियों का निवेश 42 हजार करोड़ रुपये का था. सरकार ने निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया. कई योजनाएं शुरू कीं जिससे छोटे-छोटे शहर लखनऊ ,दिल्ली और दूसरे राज्यों से आसानी से जुड़ सकें और उनके जरिये व्यापार और परिवहन बेहतर किया जा सके.

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