
रायबरेली के डीह ब्लाक के पदनमपुर बिजौली गांव के निवासी दल बहादुर कोरी (62) मौजूदा समय में सलोन विधानसभा से विधायक थे. साल 1984 में इन्होंने कानपुर में भाजपा की सदस्यता ली थी. फिर 1989 में राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे. उनकी सक्रियता और कर्मठता देख पार्टी ने 1991 में सलोन से टिकट दिया. नामांकन के लिए जाते समय सड़क दुर्घटना में इनका पैर टूट गया था. उस चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक पासी ने दल बहादुर को शिकस्त दे दी थी.
1993 में दोबारा विधानसभा चुनाव हुआ और दल बहादुर ने शिव बालक को शिकस्त दी और पहली बार भाजपा से विधायक बने. उनके बाद 1996 में विधानसभा चुनाव हुआ और दल बहादुर भाजपा के टिकट से दोबारा जीते. 2002 में समाज कल्याण राज्य मंत्री बनाए गए.
2002 विधानसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी की आशा किशोर ने कांग्रेस के शिव बालक पासी को मात दी थी. बीजेपी के दलबहादुर कोरी तीसरे स्थान पर रहे थे. जबकि बीएसपी के जगजीवन राम वाडले चौथे स्थान पर रहे थे. इसके बाद साल 2007 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के शिव बालक पासी ने समाजवादी पार्टी की आशा किशोर को हराया था. बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े दल बहादुर कोरी तीसरे स्थान पर रहे थे.
2012 विधानसभा के चुनावों में समाजवादी पार्टी की आशा किशोर ने कांग्रेस के शिव बालक पासी को हराया था. बीएसपी के विजय अंबेडकर तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि बीजेपी के दल बहादुर कोरी चौथे स्थान पर रहे थे. लेकिन अब बारी थी 2017 विधानसभा की जिसने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने दल बहादुर कोरी को अपना प्रत्याशी बनाया और इस बार दल बहादुर कोरी के हाथ निराशा नहीं आई.
दल बहादुर कोरी ने शानदार तरीके से जीत हासिल की और एक बार फिर विधानसभा पहुंचे. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी के सुरेश चौधरी को करीब 16000 मतों से हराया और विधानसभा के दरवाजे तक पहुंचे. दल बहादुर कोरी बहुत शिक्षित भी नहीं थे वे केवल 10th तक ही पढ़े थे.
बीते कई सालों से दल बहादुर कोरी का स्वास्थ्य उनका साथ नहीं दे रहा था और हार्ट की परेशानी की वजह से इन्हें अपनी एंजियोग्राफी भी कुछ साल पहले करानी पड़ेगी थी. बीते दिनों अचानक उनकी तबियत बिगड़ी उन्हें लखनऊ रेफर किया गया, जहां उनके परिवार वालों ने उन्हें प्रदेश के एक बड़े अस्पताल में भर्ती करा दिया. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है. शुक्रवार की सुबह उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली.