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यूपी सरकार ने माना दंगा राहत शिविर में मरे 34 बच्चे

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद राहत शिविरों में बच्चों की मरने की बात से अभी तक इनकार कर रही समाजवादी पार्टी की सरकार की एक बार फिर किरकिरी हुई है. मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में 34 बच्चों के मरने की बात स्वीकारी है और इसके बाद सरकार ने भी पलटी मार ली है.

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फाइल फोटो: मुजफ्फरनगर में गश्‍त लगाते सुरक्षाकर्मी
फाइल फोटो: मुजफ्फरनगर में गश्‍त लगाते सुरक्षाकर्मी

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद राहत शिविरों में बच्चों की मरने की बात से अभी तक इनकार कर रही समाजवादी पार्टी की सरकार की एक बार फिर किरकिरी हुई है. मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में 34 बच्चों के मरने की बात स्वीकारी है और इसके बाद सरकार ने भी पलटी मार ली है.

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प्रमुख सचिव गृह ए. के. गुप्ता ने बताया कि कमेटी ने 25 दिसंबर को फैक्स से जांच रिपोर्ट भेजी. रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरनगर और शामली में कुल पांच राहत शिविर चल रहे हैं. इनमें से एक मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना के लोई और बाकी चार शामली के मदरसा तैमूर शाह, बरनावी, मलकपुर और ईदगाह में चल रहे हैं. 4783 शरणार्थियों में से सबसे ज्यादा 1950 मलकपुर और 1910 लोई में रह रहे हैं. कमिटी को पता करना था कि मीडिया में जितने बच्चों के मरने की रिपोर्ट आई उनमें से कौन, कहां, कब और कैसे मरे.

कमिटी ने पाया कि शिविर में रहने वाले 34 बच्चों की अलग-अलग बीमारियों की वजह से मौत हुई. इनमें से करीब 12 ऐसे थे जिन्होंने शिविर में दम तोड़ा, बाकियों ने इलाज के लिए दूसरे स्थानों पर ले जाते समय दम तोड़ा.

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प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि चार बच्चों की मौत निमोनिया से हुई. रिपोर्ट के मुताबिक राहत शिविरों में बागपत और मेरठ के 400 से ज्यादा ऐसे परिवार हैं जिनके इलाकों में कोई हिंसा नहीं हुई. वे डर के चलते शिविरों में आकर रहने लगे. कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके मुखिया राहत मिलने के बाद उन्हें कैंपों में छोड़कर चले गए. ऐसे लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. रिपोर्ट आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने सपा सरकार को निशाने पर ले लिया है.

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन कहते हैं कि राहत शिविरों को लेकर सपा द्वारा की जा रही गलतबयानी की कलई एक बार फिर खुल गई है. डॉ. चंद्रमोहन कहते हैं कि जिस सरकार को सूबे में हो रही घटनाओं की सही जानकारी नहीं है उसे सत्ता मे रहने का कोई नैतिक हक नहीं है.

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