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यूपी का बजट पेश, अखिलेश सरकार ने बंद की लैपटॉप व बेरोजगारी भत्ता योजनाएं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2014-15 का बजट पेश कर दिया. इस बजट में उत्तर प्रदेश की तीन बहुचर्चित योजनाओं कन्या विद्या धन, लैपटॉप वितरण और बेरोजगारी भत्ते का जिक्र तक नहीं किया गया है जिसके दम पर समाजवादी पार्टी को सत्ता हासिल हुई थी यानी अब ये योजनाएं बंद कर दी गई हैं.

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अखिलेश यादव
अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2014-15 का बजट पेश कर दिया. इस बजट में उत्तर प्रदेश की तीन बहुचर्चित योजनाओं कन्या विद्या धन, लैपटॉप वितरण और बेरोजगारी भत्ते का जिक्र तक नहीं किया गया है जिसके दम पर समाजवादी पार्टी को सत्ता हासिल हुई थी यानी अब ये योजनाएं बंद कर दी गई हैं.

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अखिलेश ने सदन के भीतर 2,74,704.59 करोड़ रुपये का बजट तो जरूर पेश कर दिया लेकिन अखिलेश युवाओं से किये हुए वादे को भूल गए. ये बजट पिछले साल के मुकाबले तकरीबन 24 फीसदी ज्यादा है.

पिछले साल की तुलना में 24 फीसदी बड़ा बजट
उत्तर प्रदेश का यह बजट पिछले आठ सालों में सबसे बड़ा बजट है और इस साल के बजट का आकार पिछले साल की तुलना में 24 फीसदी बड़ा भी है लेकिन इतना भारी भरकम बजट पेश करने के बावजूद अखिलेश अपना वो वादा भूल गए जिसके दम पर 2012 में उन्हें उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल हुई थी. सपा सरकार ने अपने बजट में तीन महत्वाकांक्षी योजनाओं पर कोई चर्चा ही नहीं की गई और इसे बजट से बाहर रखा गया. कन्या विद्या धन योजना, लैपटॉप योजना और बेरोजगारी भत्ता जैसे फ्लैगशिप योजनाओं को बंद कर दिया गया है.

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इसके अलावा हमारी बेटी उसका कल और सरकारी कंबल वितरण योजनाओं को भी बजट से बाहर रखा गया. लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की करारी हार के बाद प्रदेश सरकार ने लैपटॉप वितरण योजना बंद करने के संकेत दिए थे. यूपी सरकार ने 2 लाख 74 हजार 704 करोड़ रुपये का बजट पेश कर दिया है. जबकि यूपी सरकार का राजकोषीय घाटा वित्तीय वर्ष 2014-15 का 28 हज़ार 411 करोड़ रुपये है जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 2.97 प्रतिशत है. जबकि वित्तीय वर्ष 2014-15 का राजस्व बचत 28 हजार 994 करोड़ रुपये है. जबकि समस्त लेन-देन का शुद्ध परिणाम देखा जाए तो 438 करोड़ रुपये है और अंतिम शेष 5 हजार 28 करोड़ रुपये है. यूपी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने तीसरी बार यूपी का बजट पेश किया है. इस बजट में 20 हज़ार 957 करोड़ 47 लाख रूपए की नयी योजनाये शामिल की गयी हैं.

विकास को इस बार तरजीह
अखिलेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के बजट में लोकलुभावन योजनाओं को जहां बंद किया वहीँ विकास को इस बार तरजीह दी गयी है. दरअसल, लोकसभा चुनावों में हुई करारी हार के बाद अखिलेश सरकार को समझ में आ गया है कि लोक लुभावन योजनाओं से वोटर्स को लुभा नहीं सकते हैं उसे विकास की जरूरत है. सीएम अखिलेश यादव ने मूलभूत सुविधाओं, सड़क, पुल, सिंचाई और ऊर्जा के विकास के रख रखाव की योजनाओं के लिए 49 हजार 108 करोड़ रुपये दिए गए हैं. आर्थिक विकास कार्यक्रमों के लिए 1000 करोड़ रुपये की बजट की व्यवस्था की गयी है.

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कृषि और उससे जुडी सुविधाओं के लिए 7 हजार 625 करोड़ रुपये दिए गए हैं जोकि वित्तीय वर्ष 2013-14 से 15 प्रतिशत अधिक है. शिक्षा के लिए 41 हजार 538 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है. जबकि चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में 14 हजार 377 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है. जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है.

अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, विकलांग, अल्पसंख्यक और समान्य वर्ग के गरीब व्यक्तियों के लिए 25 हजार 522 करोड़ की व्यवस्था की गयी है. जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है.

इसके आलावा लॉ एंड आर्डर के मुद्दे पर घिरी सरकार ने पुलिसकर्मियों की भर्ती और उनके आधुनिकरण के लिए 12 हजार 400 करोड़ रुपये का बजट पास किया है.

बजट पेश करने के बाद मीडिया से मुखाबित हुए सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों में खुशहाली लाना है. उन्होंने कहा कि जब तक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार नहीं होगा विकास की बात सोची भी नहीं जा सकती है. उनका मक्सद गांवों को फोरलेन से जोड़ना है. उन्होंने छात्र-छात्राओं के लिए ई-लाइब्रेरी की भी बात कही. जब सीएम से पूछा गया कि उन्होंने लैपटॉप वितरण जैसे महात्वकांक्षी योजना को बंद क्यों किया, इस पर उन्होंने जवाब दिया पहले दो बजट में इस योजना को प्रमुखता दी गई थी. सीएम ने माना कि इस बार सरकार की प्राथमिकताएं जरूर बदली हैं.

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इसके पहले विपक्षी पार्टियों ने सदन में जमकर हंगामा किया. बीजेपी और बसपा ने सदन से वाकआउट किया. यूपी विधान परिषद में बीजेपी नेता हृदय नारायण दीक्षित ने हिंसा, रेप, डकैती में सभी मुद्दो पर सुनवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि बीजेपी यूपी में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी मांग नहीं माने जाने पर विवश होकर सदन से वाकआउट करना पड़ा.

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