उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल शुरू हो गयी है. जहां एक तरफ कुछ ही महीनों का समय बाकी है वहीं सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव को लेकर अपनी अपनी रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर चुकी हैं. ऐसे में प्रदेश में देखा जा रहा है कि सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी अपने हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करने की योजना बना रही है तो वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी विधानसभा 2022 के चुनावों से पहले अल्पसंख्यक वोटरों को रिझाने की होड़ में हैं.
कांग्रेस पार्टी अपने गढ़ को ध्यान में रखते हुए उलेमाओं के साथ वर्चुअल मीटिंग कर रही है ताकि मुसलमानों के प्रति पार्टी के सर्वकालिक स्नेह और समर्थन के बारे में अपना मैसेज साफ और तेजी से फैलाया जा सके.
समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल यादव के कांग्रेस में शामिल होने और मुस्लिम वोटों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, कांग्रेस पार्टी कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी के लिए खतरा बन रही है. बता दें कि अनिल यादव पूर्व सपा नेता पंखुड़ी यादव के पति हैं, जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस का दामन थाम लिया है.
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वर्चुअल मीट का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष शाहनवाज आलम ने इंडिया टुडे को बताया कि पार्टी ने यूपी में लगभग 2 लाख मदरसों की पहचान की है और उलेमाओं के साथ लगातार वर्चुअल मीटिंग कर रही है. उन्होंने कहा कि हम उनकी बात सुन रहे हैं. उनकी जरूरतें और यह सब यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस के घोषणापत्र में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि उलेमा भी कांग्रेस के समर्थन में हैं और प्रियंका गांधी पर विश्वास करते हैं क्योंकि वह मुश्किल समय में उनके साथ खड़ी रहीं. फिर चाहे वह सीएए का मुद्दा हो या कोई और. उन्होंने स्वीकार किया कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने वोट के नाम पर मुसलमानों को ठगा है.
इसके अलावा कांग्रेस यूपी प्रमुख अजय कुमार लल्लू ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी मोड में है और दलितों, मुसलमानों आदि सहित अल्पसंख्यकों के संपर्क में है. सपा और बसपा को मौका दिया गया, उन्होंने जनता के लिए कुछ नहीं किया. उन्होंने कहा कि हम प्रियंका गांधी के कुशल नेतृत्व में यूपी में सरकार बनाने जा रहे हैं.
वहीं कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने इंडिया टुडे को बताया कि यह केवल कांग्रेस पार्टी है जो जमीन पर दिखाई दे रही है, कोई और पार्टी नहीं है. चाहे वो सपा हो या बसपा, वो कहीं नजर नहीं आ रहीं. उन्होंने कहा, "हां, हम उलेमाओं के साथ बैठक कर रहे हैं और भाजपा की दमनकारी राजनीति के साथ, सभी हमारे समर्थन में हैं."
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हालांकि, बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग एसी कमरों के अंदर रहे, वे यूपी चुनाव को दरवाजे पर देखकर बाहर आ रहे हैं और अपनी नीतियों के बारे में डींग मार रहे हैं. बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने उलेमाओं से वर्चुअल मीटिंग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सिर्फ उलेमा ही क्यों, दूसरे क्यों नहीं? उन्होंने कहा, बांटो और राज करो कांग्रेस पार्टी की नीति रही है, यूपी चुनाव में बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब देगी.
वहीं इसी बीच बीएसपी ने 2022 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को विभिन्न समुदाय, वर्गों के लोगों से साथ बैठक की. बैठक में पार्टी से जुड़े बड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे. जानकारी के मुताबिक बैठक में आने वाले चुनाव के मद्देनजर पार्टी के जनाधार को बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई.
वहीं बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के भी निर्देश दिए गए हैं. मायावती ने कहा कि पार्टी के लोग कैडर पर भरोसा करें, ऐसे नेताओं पर नहीं जो स्वार्थी हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना से प्रभावित गरीबों की मदद लगातार जारी रहनी चाहिए. इसके अलावा छोटी-छोटी कैडर बैठक के जरिए चुनाव की तैयारी किये जाने के भी निर्देश हैं. मायावती ने साफतौर पर कहा है कि पार्टी के लोग जमीनी स्तर पर पार्टी के संगठन को मजबूत करने का काम करें.
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