अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election) से पहले प्रदेश में सियासी पारा चढ़ने लगा है. अभी तक निषादों के वोटों (Nishad Voters) के लिए निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद और वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मंत्री मुकेश साहनी ही दावेदार नजर आते थे पर अब जलवंशी मोर्चा इस जंग में नया भागीदार बन गया है. इस मोर्चे की अहम बात यह है कि इसमें फूलन देवी के पति उमेद कश्यप अहम भूमिका निभाने वाले हैं.
उमेद कश्यप मोर्चे की लॉन्चिंग के मौके पर राजधानी लखनऊ आने भी वाले थे परंतु अचानक तबीयत बिगड़ने के चलते उनका दौरा टल गया. जलवंशी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र निषाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश में जलवंशी, निषाद जाति जैसे मल्लाह, केवट, धीवर, बिंद, कश्यप, गोरही, इत्यादि की जनसंख्या 18 फीसद हैं. 2022 में यूपी में होने वाले विधान सभा चुनाव में जलवंशियों का वोट काफी निर्णायक होगा. उन्होंने जलवंशियों को अरक्षण दिये जाने की मुद्दा जोर-शोर से उठाया.
ज्ञानेन्द्र निषाद ने कहा कि जलवंशी समाज को आरक्षण मिलना चाहिए. जिसके लिए हम विधान सभा सत्र के दौरान मंत्रीमंडल से जुड़े सदस्यों से मिलकर अपनी मांग रखेंगे. केंद्र और राज्य सरकार यदि हमारी मांग को नहीं मानती है तो ऐसी दशा में 15 नवम्बर को यमुना एक्सप्रेसवे पर अनिश्चित कालीन चक्का जाम करेगें.
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि जलवंशी आर्थिक, शैक्षणिक एवं राजनीति दृष्टिकोण से पिछड़ा हुए हैं. केंद्र सरकार से हम इन्हे अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग करते हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जलवंशी क्रांति दल, एकलव्य सेना, राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी, भारतीय मानव सामज पार्टी मानवहित पार्टी सहित अन्य कई संगठनों ने मिलकर जलवंशी मोर्चा का गठन किया है.
उन्होंने कहा कि यह मोर्चा यूपी के सभी 403 विधानसभा में अपना उम्मीदवार उतारेगा और जीत कर सरकार बनाने में चाबी की भूमिका में रहेगी. ज्ञानेन्द्र निषाद के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 220 सीट ऐसी हैं, जिसमें जलवंशी वोट बैंक 18 फीसद हैं.
राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र साहनी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा मछुआरों के लिए बहुत सारी लाभकारी योजना आती हैं, लेकिन जलवंशी को इसका लाभ नहीं मिल पाता है.