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अलग फसलों से तकदीर बदल रहे हैं UP के किसान, जानें- कृषि कानून पर इनकी राय

एक तरफ कृषि कानून को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में कई किसान बेहतरीन खेती कर न सिर्फ इतिहास रच रहे हैं बल्कि अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. ऐसी ही एक महिला किसान हैं विनीता पाल. गोंडा के विष्णापुर गांव की विनीता पाल ने गोंडा में वह कर दिखाया. जो लोग सपने में भी नहीं सोच सकते थे.

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उन्नाव में ड्रेगन फ्रूट की खेती कर रहे किसान
उन्नाव में ड्रेगन फ्रूट की खेती कर रहे किसान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उन्नाव में हो रही ड्रैगन फ्रूट की खेती
  • गोंडा में महिलाओं ने नर्सरी खोल की 6 लाख की कमाई
  • कृषि कानून पर कहा- MSP की गारंटी होती है तो हम सरकार के साथ

एक तरफ कृषि कानून को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में कई किसान बेहतरीन खेती कर न सिर्फ इतिहास रच रहे हैं बल्कि अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. ऐसी ही एक महिला किसान हैं विनीता पाल. गोंडा के विष्णापुर गांव की विनीता पाल ने गोंडा में वह कर दिखाया. जो लोग सपने में भी नहीं सोच सकते थे.

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गरीब परिवार की विनीता ने अपने गांव में दस महिलाओं का समूह बनाया और 7 बीघा खेत किराये पर लिया. उसमें उन्होंने पौधों की नर्सरी तैयार की. विनीता आज की तारीख में हर साल 6  लाख रुपया सालाना कमाती हैं. इतना ही नहीं, सरकारी सहायता से इस समूह के पास ट्रैक्टर भी आ गया है जिसको किराये पर चलवा कर उससे भी आमदनी करती हैं. दरअसल विनीता के पति रोजगार के लिए बाहर काम करते थे. शादी के बाद अब विनीता के तीन बच्चे हैं. दो बेटे, एक बेटी. जब परिवार बढ़ा, विनीता ने अपने गांव की ही महिलाओं से कुछ करने की बात कही. सभी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी.

तब 10 महिलाओं ने मिलकर फरवरी 19 में धनगड स्वयं सहायता समूह बनाया और गांव  में ही 7 बीघा खेत 30 हजार रुपया सालाना किराये पर लिया और नर्सरी तैयार की. जिसमें आम, अमरुद, यूकिलिप्टस समेत अन्य पौधों के हजारों पौधे लगाए जाते हैं.  इनके पौधों की बिक्री होने लगी समूह तो अपने पौधों को ब्लाक में बेचना शुरू किया. इनके पौधे लखनऊ भी बिकने जाने लगे. विनीता बताती हैं कि इससे 6 लाख रुपया सालाना आमदनी होने लगी, जिसको सब बराबर बांट लेती हैं. इनके कामों की गूंज शासन प्रशासन तक पहुंची तो प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने भी विनीता से बात की और उनकी तारीफ की. 

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कृषि कानून पर क्या कहतीं हैं विनीता-
विनीता ने बताया की उनको कृषि कानून के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उनको अपने खेतों से ही फुर्सत नहीं मिलती. वह इसके बारे में कुछ नहीं जानतीं, लेकिन कहती हैं कि अगर मोदी जी बिल लाये हैं तो अच्छा ही होगा.

पीलीभीत में गुरु मंगद सिंह करते हैं फसलों से जुड़े नए शोध
पीलीभीत में 43 साल के किसान गुरु मंगद सिंह किसान वैज्ञानिक के नाम से प्रसिद्ध हैं. क्योंकि यह फसलों से जुड़े नए-नए शोध करते रहते हैं. जिसके चलते कई शोध संस्थानों से इनको सम्मानित भी किया गया. इन्होंने गन्ना, धान, गेंहू की फसल को बेचने और उसके भुगतान को लेकर आने वाली दिक्कतों से निजात पाने के लिए फसल के बीजों और नगदी फसल में नए-नए काम किये. वैज्ञानिक किसान के रूप में प्रसिद्ध गुरु मंगद सिंह पीलीभीत के पूरनपुर तहसील के गांव  सिमरिया तालुके महाराजपुर में खेत के बीचोबीच अपना घर बना कर रहते हैं. गुरुमंगद सिंह ने अपने पिता को धान, गेहूं औऱ गन्ने की फसल को लेकर होने वाली परेशानियों को देखा है.

उन्होंने देखा है कि किस तरह गन्ना भुगतान और धान, गेंहू को बेचने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. जिसके चलते गुरुमंगद सिंह सरकारी वैज्ञानिकों के सपंर्क में आये और खुद बीज तैयार करने लगे. इनका गन्ने का तैयार किया हुआ बीज इनके घर से ही बिक जाता है, इनका गन्ने का बीज आसपास के जिलों में मॉडल बन गया, मेरठ, मुरादाबाद और उत्तराखंड से लोग इनका घर बैठे बीज ले जाते हैं. गन्ना ही नहीं, मटर आलू के बीज भी बनाते हैं. गुरुमंगद सिंह शोध केंद्र से बीज लाते हैं फिर उसको अपने यहां नए तरीक़े से उसको तैयार करते हैं, फिर बीज अपने खेतों में बोते हैं. उसका तैयार बीज बेचते हैं. इनको बीज को बेचने के लिये किसी मंडी, सेंटर नहीं जाना पड़़ता, न लाइन, न समर्थन मूल्य का इंतजार करना पड़ता है और न ही अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं. इनके द्वारा तैयार बीज घर बैठे बिक जाते हैं.

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कृषि  कानून पर क्या कहते हैं गुरुमंगत सिंह
वहीं, सरकार द्वारा लाये गये बिल को लेकर इनका कहना है कि वो किसानों के साथ हैं. अगर MSP की गारंटी होती है तो हम सरकार के साथ हैं, थोड़ा सही है बिल और थोड़ा गलत. किसान पूरा बिल समझ नहीं पा रहे हैं. और जो जन आंदोलन है उसमें किसानों का भरा हुआ गुस्सा है, सरकार को यह देखना चाहिए.

अपनी किस्मत खुद लिख रहे उन्नाव के किसान
ऐसे ही एक किसान हैं उन्नाव में, जो लॉकडाउन में हार न मानते हुए अपनी किस्मत गाथा खुद लिख रहे हैं. उत्तर प्रदेश के जनपद उन्नाव के रहने वाले विनोद कुमार गुप्ता व उनके पुत्र विनय गुप्ता ने विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट की खेती करके पूरे प्रदेश के किसानों को आश्चर्यचकित किया है. अमूमन ड्रैगन फ्रूट चीन, मलेशिया, थाईलैंड और श्रीलंका जैसे देशों में पैदा किया जाता है. क्योंकि वहां की जलवायु ड्रैगन फ्रूट की खेती के अनुकूल होती है. उन्नाव के बागरमऊ तहसील के जगत नगर गांव के रहने वाले विनोद गुप्ता व विनय गुप्ता ने अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट की खेती करके एक नई मिसाल पेश की है.

पिता-पुत्र की इस लगन और मेहनत को देखकर जनपद के जिलाधिकारी ने भी पिता-पुत्र के इस प्रयास पर उन्हें बधाइयां दी हैं. विनोद गुप्ता बताते हैं कि हम कुछ नया करना चाहते थे. फिर इस की जानकारी यूट्यूब पर देखी और इसके बाद इसकी खेती शुरू कर दी. इनका कहना है कि फसल तैयार होने के बाद इनकी आमदनी कई गुना बढ़ जाएगी. कृषि कानून को लेकर विनय गुप्ता से उनकी राय ली गई तो उन्होंने कहा कि हम कृषि कानून के विरोध में हैं. 

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(गोंडा से अंचल श्रीवास्तव के इनपुट के साथ)

 

 

 

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