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EWS कोटे से भाई की नियुक्ति पर बवाल, यूपी के मंत्री बोले- करा लो जांच

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि अगर आपको लगता है कि मैं विधायक, मंत्री हूं तो भाई कैसे ईडब्ल्यूएस कैसे हो गया तो भाई की अलग आइडेंटिटिटी है. उन्होंने कहा कि भाई के पास प्रशासन की तरफ से दिया गया प्रमाण पत्र है.

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यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी (फाइल फोटो)
यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कहा- जिसको आपत्ति हो वो करा सकता है जांच
  • राज्यपाल ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से मांगा जवाब

उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के छोटे भाई अरुण द्विवेदी की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति को लेकर घमासान जारी है. सतीश कुमार द्विवेदी के छोटे भाई को जब आर्थिक रूप से कमजोर कोटे के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नौकरी मिल गई तो सवाल पूछा जाने लगा कि क्या ये आपदा में छोटे भाई के लिए चुपचाप अवसर खोजा गया है? आरोप लगाकर पूछा जाने लगा कि एक मंत्री का छोटा भाई आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) के कोटे में कैसे आ सकता है?

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सियासी गलियारों से सवालों के तीर चले तो बेसिक शिक्षा मंत्री का बयान भी आ गया. बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि अगर आपको लगता है कि मैं विधायक, मंत्री हूं तो भाई कैसे ईडब्ल्यूएस कैसे हो गया तो भाई की अलग आइडेंटिटिटी है. उन्होंने कहा कि भाई के पास प्रशासन की तरफ से दिया गया प्रमाण पत्र है. सतीश द्विवेदी ने कहा कि जिसको कोई आपत्ति हो, वो जांच करा सकता है. मेरा कोई हस्तक्षेप नहीं है.

वहीं, इसे लेकर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर अरुण द्विवेदी ने नियमों का हवाला दिया और कहा कि आठ लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले इसके दायरे में आते हैं. आरोप इस बात को लेकर भी लग रहे हैं कि अरुण द्विवेदी पहले भी कई विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुके हैं तो फिर वे आर्थिक रूप से कमजोर की कैटेगरी में कैसे आ गए.

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इस आरोप पर भी अरुण द्विवेदी ने कहा कि डीआरडीओ में रिसर्च किया. सेंट्रल यूनिवर्सिटी हरियाणा में छह महीने काम किया. वनस्थली विद्यापीठ में डेढ़ साल काम किया. लोग लिख रहे हैं कि प्रोफेसर हैं. एडहॉक पर असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. दूसरी तरफ, नियमों पर गौर करें तो ईडब्ल्यूएस की कैटेगरी में वही आता है जिसकी सालाना आमदनी आठ लाख रुपये से कम हो, 5 एकड़ से कम जमीन हो और घर 1000 वर्ग मीटर से कम में बना हो. क्या इन पैमानों पर खरा उतरने पर मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई का आर्थिक रूप से कमजोर वाला सर्टिफिकेट बनाया गया था?

इसपर इटावा के एसडीएम उत्कर्ष श्रीवास्तव ने कहा कि अरुण द्विवेदी के नाम से नवंबर 2019 में सर्टिफिकेट जारी हुआ था. सभी नियमों को पूरा करते हुए ही यह प्रमाण पत्र तहसीलदार के दफ्तर से जारी किया गया था. ईडब्ल्यूएस का सर्टिफिकेट एक साल के लिए जारी किया जाता है. अरुण द्विवेदी के मुताबिक उन्होंने साल 2019 में आवेदन करते समय ही ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनवाकर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में जमा कराया था जिसके आधार पर उन्हें नौकरी मिली. अब आरोप ये भी लग रहे हैं कि मंत्री के भाई अरुण द्विवेदी की शादी साल 2020 में जिनसे हुई, वो भी एक कॉलेज में पढ़ाती हैं. ऐसे में परिवार की आय के आधार पर क्या अब भी ये नहीं देखा जाना चाहिए कि क्या वाकई ये आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आते हैं या नहीं?

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अरुण द्विवेदी ने कहा कि पैतृक संपत्ति में पांच हिस्सेदार हैं. हिस्सेदारी इतनी नहीं कि वे ईडब्ल्यूएस के दायरे में न आएं. गौरतलब है कि साल 2016 में यूपी के कपिलवस्तु स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए दो पदों पर भर्ती निकली थी. 21 मई 2021 को एक पद पर मंत्री सतीश द्विवेदी की ईडब्ल्यूएस कोटे से नियुक्ति हुई.

प्रियंका गांधी से लेकर संजय सिंह तक ने उठाए थे सवाल

अरुण द्विवेदी की ईडब्ल्यूएस कोटे से नियुक्ति पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह तक ने सवाल उठाए. सियासी गलियारों में शोर मचा तब यूपी की राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से जवाब मांगा और कहा कि इसकी जल्द जांच होनी चाहिए जिससे बेरोजगारी के संकट के समय लोगों का नियुक्ति की पारदर्शिता से भरोसा न टूटे.

बता दें कि यूपी सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी चार भाई हैं. द्विवेदी खुद मंत्री हैं जबकि अन्य तीन भाइयों में से एक भाई खेती करते हैं वहीं एक भाई जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक हैं. तीसरे भाई अरुण द्विवेदी की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति को लेकर घमासान मचा है.

 

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