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यूपी: जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के दावों की खुली पोल, कई जिलों में बाढ़ ने मचाई तबाही

उत्तर प्रदेश के कई जिलों से आई रिपोर्ट जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के दावों की पोल खोल रही है. चाहे वह बुंदेलखंड का हमीरपुर हो या संगम नगरी प्रयागराज या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी या मिर्जापुर या बाराबंकी या सीतापुर या फर्रुखाबाद. हर तरफ नदियां उफान पर हैं और बाढ़ की वजह से सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं.

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यूपी के कई जिलों में बाढ़ से हाहाकार (फोटो- पीटीआई)
यूपी के कई जिलों में बाढ़ से हाहाकार (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के दावे की खुली पोल
  • प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
  • घर छोड़कर जाने को मजबूर हुए लोग

उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने पिछले 6 अगस्त को आजतक के कार्यक्रम "पंचायत आजतक" में दावा किया था कि उत्तर प्रदेश में अभी बाढ़ का असर दिखाई नहीं दे रहा है और हालात सामान्य हैं. लेकिन इसके उलट उत्तर प्रदेश के कई जिलों से आई रिपोर्ट जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के दावों की पोल खोल रही है. चाहे वह बुंदेलखंड का हमीरपुर हो या संगम नगरी प्रयागराज या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी या मिर्जापुर या बाराबंकी या सीतापुर या फर्रुखाबाद. हर तरफ नदियां उफान पर हैं और बाढ़ की वजह से सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं. जानते हैं यूपी के अलग-अलग जिलों में बाढ़ के क्या हालात हैं?

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वाराणसी में गंगा खतरे के निशान से ऊपर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा का जलस्तर 71.36 मीटर दर्ज किया गया है. जो खतरे के निशान 71.26 मीटर से 10 सेंटीमीटर ऊपर है. उफनाई गंगा के चलते उसकी सहायक नदी वरूणा का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है. जिसके चलते गंगा और वरूणा दोनों के तटों पर बसे रिहायशी इलाकों में हजारों मकान जलमग्न हो चुके हैं. इन बाढ़ग्रस्त इलाकों से लोगों का पलायन राहत शिविरों की ओर हो चला है. वाराणसी में गंगा किनारे बसी तमाम कालोनियां हों या फिर वरूणा के किनारे बसी दर्जनों बुनकर बस्तियां, इन इलाकों के हजारों लोग बाढ़ प्रभावित हो चुके हैं.
       
बाढ़ प्रभावित इलाके में से एक मारुति नगर के रहने वाले राम सिंह बताते हैं कि प्रत्येक साल बाढ़ में पानी उनके घर में घुस आता है. जबतक गंगा और उनकी कॉलोनी के बीच में गेट नहीं लग जाता, तबतक समस्या बनी रहेगी. उनकी कॉलोनी से पलायन करने वाले या तो बिहार चले जा रहें हैं या तो फिर फ्लैट किराए पर लेकर रह रहें हैं. वहीं उसी कालोनी के अभय सिंह ने बताया कि कई लोग घरों की छतों पर रहेंगे. जिसमें परिवार की महिलाएं और बच्चें भी रहते हैं. बिजली भी काट दी जाती है. लगभग एक हजार लोग कॉलोनी से पलायन कर चुके हैं.

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वाराणसी के वरुणा पार बाढ़ग्रस्त इलाके में से एक शैलपुत्री मड़िया के बाढ़ पीड़ित संदीप यादव ने बताया कि सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है और बाढ़ से बचने के लिए सड़क पर तिरपाल डालकर रहना पड़ रहा है. एक अन्य बाढ़ ग्रस्त इलाके के रहने वाले बुनकर मो. जुनैद ने बताया कि कोरोना महामारी विस्तार ले रही है. बाढ़ के चलते, मुसीबत और बढ़ गई है. उनका परिवार मदरसे में रह रहा है. बाढ़ राहत शिविर में खाना और रहने की जगह मिली है.

प्रयागराज में गंगा यमुना ने मचाई तबाही

उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने दावा किया है कि इस साल अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में बाढ़ का ज्यादा असर नहीं पड़ा है. लेकिन संगम के शहर प्रयागराज के कछारी इलाके में बने हज़ारो घर गंगा यमुना की बाढ़ के पानी में समा गए हैं. संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियां उफान पर हैं.

दोनों नदियां खतरे के निशान को पार कर गई हैं. एक मंजिला मकानों में पानी चला गया है. चोरी के डर से लोग अपनी गृहस्थी लेकर दूसरी मंजिल में रहने को मजबूर हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब आने जाने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा बचा है.

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गंगा यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर हो गया है. प्रयागराज के सलोरी, छोटा बघाड़ा, राजापुर, दारागंज, करेली के ज्यादातर घर पानी में डूब गए हैं.

मिर्जापुर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब

मिर्ज़ापुर में भी गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है. लगातार गंगा के पानी में वृद्धि जारी है. गंगा का जलस्तर इस समय खतरे के निशान 77.72 मीटर से महज 40 सेंटीमीटर नीचे है. फिलहाल जलस्तर करीब 77.30 मीटर तक पहुंच गया है. जिले के सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित दो तहसील क्षेत्र हैं. जिसमें सदर तहसील और चुनार तहसील के आधा दर्जन गांव प्रभावित हैं. बाढ़ के बाद गांवो में स्थिति अब गंभीर होती जा रही है. 

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित सदर तहसील के हरसिंगपुर और मल्लेपुर गांव है. यहां की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बाढ़ से प्रभावित इलाके के हरसिंगपुर और अकोढ़ी गांव का दौरा किया. डीएम ने अधिकारियों के साथ नाव पर सवार होकर प्रभावित गांवों का जायजा लिया और अधिकारियों को बाढ़ पीड़ितों की मदद का निर्देश दिया. वहीं बाढ़ की वजह से चील्ह इलाक़े में गंगा के किनारे बना श्मशान घाट डूब गया है. गंगा में लगातार बाढ़ का पानी दो सेंटीमीटर प्रति घण्टा की रफ्तार से बढ़ रहा है.

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और पढ़ें- कॉलोनियों में चल रही नाव, डूबे मकान...वाराणसी समेत यूपी के कई जिलों में बाढ़ का कोहराम

फतेहपुर में गंगा यमुना उफनाई, 50 से ज्यादा गांव प्रभावित

यूपी के फतेहपुर जिले में गंगा व यमुना नदी ने अपना रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है. दिन प्रतिदिन यहां की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. हालात यह है कि नदी के तेज बहाव के कारण जिले के लगभग 50 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है. इस कारण लोगों को गांव से पलायन कर, जिला प्रशासन द्वारा बनाये गए कैम्पों में रहना पड़ रहा है. जिले के यमुना तटीय क्षेत्र की बात करें तो यमुना का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि दो जिलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग से गुजरने के लिए लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है. लोगों के साथ नावों में भारी वाहन और गृहस्थी का पूरा सामन लादकर इलाके से बाहर निकल रहे हैं. 

हमीरपुर में यमुना और बेतवा ने मचाई तबाही

यूपी के हमीरपुर जिले में बहने वाली यमुना और बेतवा नदियां खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर बह रही है. जिससे जिले में भीषण बाढ़ का कहर चल रहा है. प्रदेश के जलशक्ति मंत्री के दावे के उलट हमीरपुर जिले में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है. बाढ़ पीड़ितों से मिलने आये मंडल आयुक्त दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दोनों नदियों में बाढ़ से करीब 64 गांव प्रभावित हुये हैं. पिछले पांच दिनों से बाढ़ का कहर जारी है. जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. जिनके घरों में पानी भर गया है वो नेशनल हाइवे 34 के किनारे पन्नी लगा कर परिवार सहित रहने को मजबूर हैं. वहीं करीब 15 सौ लोगो को बाढ़ राहत केंद्र में भेजा गया है. इस भीषण बाढ़ में कई दर्जन गांवों का सम्पर्क भी कट गया है. 

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शारदा और घाघरा ने सीतापुर में मचाई तबाही 

बाढ़ से सीतापुर के भी दो विकास खंडों रामपुर मथुरा व रेउसा के लगभग एक दर्जन गांवो के कई पुरवे प्रभावित हैं. नेपाल से छोड़े गए पानी व पहाड़ी इलाके से शारदा और घाघरा में आ रहे पानी के चलते रामपुर मथुरा विकासखंड के ग्राम अखरी के शंकरपुर, कनरखी के सोतीपुरवा व अंगरोरा में स्थिति ज्यादा खराब है. रेउसा विकासखंड के मल्लापुर व काशीपुर में भी तमाम खर्च के बाद बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिल सका है. हालांकि बीते दिनों जल शक्ति मंत्री ने हालात पर काबू कर लेने के तमाम दावे किए थे. लेकिन इसके ठीक उलट कभी पानी के बढ़ने और कभी पानी घटने के साथ कटान के शुरू होने से सीतापुर के गांजरी इलाके में हालात पूर्व के वर्षों की तरह अभी भी खराब हैं.

फर्रुखाबाद में बाढ़ के पानी से दर्जनों गांव प्रभावित

फर्रुखाबाद के दोआबा यानी गंगा व रामगंगा में हर साल बाढ़ अपना कहर दिखाती है. आने वाली बाढ़ से हर साल यहां के लोगों को अपना आशियाना बाढ़ के पानी में अपनी आंखों से समाते हुए देखना पड़ता है. पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश व बांधो से छोड़े जा रहे पानी से मैदानी इलाको में नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है. फ़र्रुखाबाद के दोआबा क्षेत्र यानी गंगा व राम गंगा के बीच के कटरी क्षेत्र के बाशिंदों की तकदीर में बाढ़ की विभीषिका से हर साल बसना बिछड़ना लिखा है.

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फर्रुखाबाद में गंगा व रामगंगा दोनो नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है. ज़िले की दो तहसीलों अमृतपुर व कायमगंज तहसील के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. घर-मकान, खेत-खलियान सब कुछ बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं. ग्रामीण अपने मकानों को छोड़कर सड़कों पर आशियाना बनाए हैं. गांव में आवागमन के सभी रास्ते पानी से डूब रहे हैं आने जाने का सिर्फ नाव ही सहारा है.

बाढ़ प्रभावित लोग अपना घर मकान सब कुछ छोड़ कर सड़को के किनारे पन्नी डाल कर गुज़ारा कर रहे है. इंसानों से लेकर जानवरो तक के खाने पीने का संकट पैदा हो गया है. मुख्य मार्गो पर भी बाढ़ का पानी बह रहा है. लोगों को पानी से गुज़र कर ही जाना पड़ रहा है. सबसे खराब हालात तो गांवो के अंदर के हैं. जहां गलियों में भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. जहां लोग पैदल या वाहन से चलते थे. वहां आज नावें चल रही है. बाढ़ से सैकड़ो एकड़ फसल भी नष्ट हो चुकी हैं. इंसानों से लेकर जानवरों तक के खाने पीने का संकट पैदा हो गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों को अभी तक कोई सरकारी सुविधा भी नही मिली है. बाढ़ प्रभावित इलाके के लोग सिर्फ भगवान से ही आस लगाए बैठे हैं.

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(वाराणसी से रोशन जायसवाल, हमीरपुर से नाहिद अंसारी, मिर्जापुर से सुरेश सिंह, सीतापुर से अरविंद मोहन, फर्रुखाबाद से फिरोज खान और फतेहपुर से नितेश श्रीवास्तव)

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