UP Lok Sabha by Election: उत्तर प्रदेश में लोकसभा उप चुनाव में कयास लगाए जा रहे थे कि समाजवादी पार्टी की ओर दलित चेहरे को उतारा जा सकता है, लेकिन अब सपा मुलायम परिवार के ही किसी चेहरे को उप चुनाव में उतार सकती है. पहले कयास लगाए जा रहे थे कि आजमगढ़ से सुशील आनंद सपा का चेहरा हो सकते हैं. वहीं अब माना जा रहा है कि पार्टी डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव पर दांव लगा सकती है.
डिंपल यादव के चुनाव लड़ने के आसार आजमगढ़ से सबसे ज्यादा हैं. बता दें कि यूपी में 2 लोकसभा सीटों के उपचुनाव में सोमवार (06 जून) को नामांकन का आखिरी दिन है, लेकिन समाजवादी पार्टी अभी तक यहां से स्पष्ट रूप से अपने उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर सकी है. माना जा रहा है कि आजमगढ़ से डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव नामांकन कर सकते हैं.
डिंपल यादव पर दांव लगा सकती है सपा
लोकसभा उपचुनाव में सपा ने मुलायम परिवार से डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव पर दांव लगाने का मन बनाया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी पूर्व सांसद डिंपल यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज संसदीय क्षेत्र से चुनाव हार गई थीं. डिंपल यादव को राज्यसभा चुनाव 2022 के लिए प्रदेश से नामित किए करने की भी अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन आखिरी समय में सपा ने RLD प्रमुख जयंत चौधरी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने पर मुहर लगा दी. अब आजमगढ़ से डिंपल को उप चुनाव में लाने की बात कही जा रही है. वहीं मुलायम परिवार के दूसरे चेहरे धर्मेंद्र यादव की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो 2019 में बदायूं संसदीय सीट से स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य से चुनाव हार गए थे.
भाजपा ने दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' पर लगाया है दांव
चर्चा थी कि इस बार समाजवादी पार्टी आजमगढ़ में दलित कार्ड का प्रयोग करेगी, लेकिन स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेताओं और आजमगढ़ की जिला यूनिट के विरोध के बाद अखिलेश यादव ने अपना मन बदल लिया है. सपा यहां से डिंपल यादव पर पार्टी दांव लगा सकती है. वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा उपचुनाव के लिए आजमगढ़ से भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को उम्मीदवार बनाया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी दिनेश लाल यादव को भाजपा ने आजमगढ़ सीट से उतारा था. हालांकि वो चुनाव हार गए थे. इसके रामपुर सीट से बीजेपी का चेहरा घनश्याम लोधी होंगे.
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बता दें कि आजमगढ़ सीट अखिलेश यादव और रामपुर सीट आजम खान के लोकसभा सदस्य पद से इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है. सपा को उम्मीद है कि उसे यादव वोटों का फायदा मिल सकता है. यहां यादव वोटों की संख्या अधिक है. इस लिहाज से सपा अगर आजमगढ़ से हारती है तो उसका असर आगामी लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है. आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव भी सांसद रहे हैं.
पहले सपा की ओर से सुशील आनंद को लेकर लगाए जा रहे थे कयास
इससे पहले कहा जा रहा था कि बामसेफ के संस्थापक सदस्यों में रहे बलिहारी बाबू के बेटे सुशील आनंद को समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ से लोकसभा उपचुनाव का टिकट दिया है, चर्चा थी कि दलित वोट को लेकर अखिलेश यादव बड़ा दांव चल रहे हैं, लेकिन अब यह फैसला सपा ने बदल दिया है. बलिहारी बाबू सपा से पहले लंबे समय तक बामसेफ और फिर बसपा के साथ रहे. कोरोना काल में उनकी मृत्यु हो गई थी.
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