उन्होंने कहा, 'नोएडा में गर्भवती महिला दर-दर भटकती रही और अस्पताल में जगह नहीं मिली. पूरा का पूरा स्वास्थ्य सिस्टम ध्वस्त है. इस महिला के मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा. सरकार की जिम्मेदारी तय करें और नोएडा प्रशासन पर कार्रवाई करें. सिर्फ दिखावे और कागज की कार्रवाई हो रही है और बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती.'
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने भी योगी सरकार की आलोचना की है. उन्होंने भी नोएडा में हुई घटना पर दोषी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
गर्भवती महिला को ले जा रही एंबुलेंस को शेरों ने घेरा, गाड़ी में हुई डिलीवरी
वहीं कांग्रेस पार्टी की विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि जिस तरीके से वह गर्भवती महिला गौतम बुद्ध नगर के 8 अस्पतालों में गई, यह साफ दर्शाता है कि किस तरीके से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. मेरा सरकार से सीधा सवाल है कि और कितनी आहुतियां सरकार लेगी, तब वह जागेगी.
क्या है पूरा मामला?
नोएडा में गर्भवती महिला ने इलाज के अभाव में एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. कई घंटों तक गर्भवती महिला को एंबुलेंस एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल लेकर दौड़ती रही लेकिन नोएडा के बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों ने महिला को एडमिट करने से इनकार कर दिया.
महिला गाजियाबाद की रहने वाली थी. महिला को सांस लेने की दिक्कत थी. जब परेशानी हुई तो पहले ईएसआई अस्पताल ले गए. अस्पताल ने जिला अस्पताल में रेफर किया. जिला अस्पताल ने शारदा हॉस्पिटल भेजा. वहां से जीम्स भेजा गया, जिम्स ने बेड खाली न होने की बात कही. महिला को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया. वहां भी लोगों ने मना कर दिया. फिर महिला को मैक्स अस्पताल ले जाया गया. देर हो जाने की वजह से महिला की एंबुलेंस में ही मौत हो गई.
आधी रात को अस्पतालों के चक्कर लगाती रही प्रेग्नेंट महिला, ऑटो में मौत
गौरतलब है कि महिला का रुटीन इलाज नोएडा के शिवालिक अस्पताल में चल रहा था. इस अस्पताल ने इलाज करने से मना कर दिया था. महिला को कोरोना के डर के चलते अस्पतालों ने मना कर दिया. जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.