उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव को 2022 का सेमीफाइल माना जा रहा है. 'गांधी परिवार' के मजबूत दुर्ग माने रायबरेली जिले में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल को मतदान है. इस बार रायबरेली की जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जिसके चलते दलित समुदाय के तमाम दिग्गज नेता चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. रायबरेली के महाराजगंज प्रथम जिला पंचायत सदस्य की सीट पर तीन पूर्व विधायकों की साख दांव पर लगी है. इतना ही नहीं एक पूर्व विधायक के सामने तो उनकी पत्नी ने ही ताल ठोक रखी है.
रायबरेली महाराजगंज प्रथम से जिला पंचायत सदस्य की सीट सबसे हाईप्रोफाइल मानी जा रही है. यहां बछरावां सीट से जीत दर्ज करने वाले तीन पूर्व विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. जिले की बछरावां सुरक्षित सीट से विधायक रहे राजराम त्यागी, श्यामसुंदर भारती और रामलाल अकेला के सियासी भविष्य का फैसला महाराजगंज प्रथम जिला पंचायत सीट पर होने वाला है, जिसके चुनावी नतीजे जिले के सियासी भविष्य तय करने वाले होंगे.
बछरावां सीट से कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक राजाराम त्यागी इस पर बीजेपी के समर्थन से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर सपा से दो बार के विधायक रहे रामलाल अकेला के बेटे व बछरावां से मौजूदा ब्लाक प्रमुख विक्रांत अकेला चुनावी मैदान में उतरे हैं, जो सपा समर्पित प्रत्याशी होने का दावा कर रहे हैं. हालांकि, इसी सीट से पूर्व विधायक श्याम सुंदर भारती खुद और उनकी पत्नी चंद्रकली आमने-सामने हैं. चंद्रकली खुद को सपा प्रत्याशी बता रही हैं. श्यामसुंदर भारती अपनी पत्नी को चुनावी मात नहीं देना चाहते हैं बल्कि उन्हें जिताने के लिए मशक्कत कर रहे हैं
बता दें कि 1996 में बसपा के टिकट से बछरावां विधानसभा की आरक्षित सीट से विधायक बने श्यामसुंदर भारती से उनकी पत्ति के चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अपना नामांकन तो उन्होंने पत्नी के साथ चुनाव के दौरान रहने के लिए करवा लिया था बाकी चुनाव तो उनकी पत्नी चंद्रकली ही लड़ रही हैं. इस तरह से श्याम सुंदर भारती खुद के लिए वोट मांगने के बजाय अपनी पत्नि के लोगों से समर्थन मांग रहे हैं.
श्यामसुंदर भारती की राजनीति का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उनके घर में कांग्रेस के सहयोग से मिली हुई सोलर लाइट उनके बरामदे की शोभा बढ़ा रही है तो घर की छत पर सपा का झंडा लहरा रहा है. श्याम सुंदर भारती ने कहा कि समाजवादी पार्टी का सहयोग मिल रहा है और उन्होंने जिला अध्यक्ष के कहने पर अपनी पत्नी का नामांकन कराया है. हालांकि, उनकी सियासी राह में सबसे बड़े रोड़ा सपा से दोबार से बछरावां से विधायक रहे रामलाल अकेला के बेटे विक्रांत बन गए हैं.
बछरांवा से ब्लाक प्रमुख विक्रांत अकेला इस बार महाराजगंज सीट से जिला पंचायत सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रहे हैं. वो सपा का झंडा और अखिलेश यादव का पोस्टर लगाकर वोट मांग रहे हैं. विक्रांत अकेला कहते हैं कि जनता सब जानती है कौन सपा का है और कौन नहीं. अलग-अलग चुनाव सिंबल है. हमारे पिता ने हमेशा से क्षेत्र की सेवा की है और जनता के साथ हमेशा उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने का काम किया है. हमारा वोटर बिल्कुल कंफ्यूज नहीं है. महाराजगंज प्रथम से उम्मीदवार बन कर आए हैं, जनता यह सब जान चुकी है.
वहीं, श्यामसुंदर भारती कहते हैं कि महाराजगंज की जनता और वोटर बहुत समझदार है. वोटरों में किसी तरह का कोई कंफ्यूज नहीं हैं सब लोग जानते हैं कि विधायक जी अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा रहे हैं. विपक्ष तो कंफ्यूज करते रहते हैं, लेकिन मतदाता का नजरिया साफ है. क्षेत्र की जनता कह रही है कि किसी भी बाहरी शख्स को नहीं जिताएंगे, क्योंकि चुनाव के बाद वो नजर नहीं आते हैं. ऐसे में वो अपने ही क्षेत्र के लोगों को चुनकर जिला पंचायत भेजना चाहते हैं.
महाराजगंज की जिला पंचायत सीट पर सपा के खिलाफ बीजेपी ने बछरावां से पूर्व विधायक राजराम त्यागी पर दांव लगाया है. हालांकि, राजराम त्यागी कांग्रेस से विधानसभा पहुंचे, लेकिन जिला पंचायत पहुंचने के लिए बीजेपी के सहारे मैदान में उतरे हैं. सत्ता धारी दल के होने के नाते राजाराम त्यागी की मजबूत दावेदारी मानी जा रही है, लेकिन दो बार के पूर्व विधायक के बेटे और एक बार के विधायक की पत्नी के उतरने से मुकाबला काफी रोचक हो गया है.