कानपुर के कुख्यात अपराधी विकास दुबे के मरने के बाद अब पहली बार उसके गांव में उसकी मर्जी के खिलाफ प्रधान चुना जाएगा. इस बार 10 प्रत्याशी गांव में प्रधानी चुनाव लड़ रहे हैं. बिकरु पंचायत में 2 गांव आते हैं एक गांव बिकरु और दूसरा डिब्बा नेवादा. इस बार बिकरु का प्रधान बनने के लिए बिकरु से सात और नेवादा से तीन लोगों ने नामांकन कराया है. बिकरु गांव की सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है.
पहले बिकरु में वही प्रधान होता था जिसको विकास दुबे चाहता था. सबसे पहले 1995 में विकास दुबे प्रधान हुआ उसके खिलाफ कोई खड़ा नहीं हो सका. इसके बाद 2000 में उसने अनुसूचित जाति की सीट होने पर उसने गायत्री को निर्विरोध प्रधान बनवाया. 2005 में सीट सामान्य हुई तो फिर अपने भाई दीपू की पत्नी अंजली को निर्विरोध प्रधान बनाया.
2010 में ये सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई तो उसने निर्विरोध अपने शागिर्द रजनीकांत को प्रधान बनाया. 2015 में ये सीट फिर सामान्य हुई तो उसने एक बार फिर भाई दीपू की पत्नी अंजली को निर्विरोध प्रधान बनवाया था.
पहली बार बिकरु के लोग अपनी मर्जी से गांव का प्रधान चुनेंगे. गांव में चारों तरफ प्रत्याशियों के पोस्टर लग गए हैं. लोग गांव में प्रचार भी कर रहे हैं पुलिस प्रशासन ने अपनी तरफ से पूरी व्यवस्था कर रखी है कि कोई विवाद ना हो, वैसे विवाद होने का कोई चांस भी नहीं है क्योंकि पहले ही पुलिस विकास के दबंग साथियों को जेल भेज चुकी है. इस बार गांव के प्रधान प्रत्याशियों में विकास के परिवार का कोई दखल नहीं देखा जा रहा है.