उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान 577 बेसिक शिक्षकों की मौत हो चुकी है. यह दावा राज्य शिक्षक संगठन ने किया है. इसके बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि यह खबर बेहद डरावनी है. उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि यूपी पंचायत चुनावों की ड्यूटी में लगे लगभग 500 शिक्षकों की मृत्यु की खबर दुखद और डरावनी है. चुनाव ड्यूटी करने वालों की सुरक्षा का प्रबंध लचर था तो उनको क्यों भेजा? सभी शिक्षकों के परिवारों को 50 लाख रुपये मुआवजा व आश्रितों को नौकरी की मांग का मैं पुरजोर समर्थन करती हूं.
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का आगाज कोरोना काल के बीच हुआ है. ऐसे में कोरोना के बढ़ते मामले और उन से संक्रमित हुए लोगों की मौत दिन-ब-दिन हो रही है. इसी भयावह स्थिति के चलते अब पंचायत चुनाव की मतगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारी सहमे हुए हैं. उनमें इस वायरस को लेकर डर है क्योंकि चुनावी ड्यूटी के दौरान कई कर्मचारी पहले ही इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, चाहे वह शिक्षकगण रहे हों या अन्य विभागों के कर्मचारी या फिर अधिकारीगण.
ड्यूटी में लगे हुए कई लोगों की कोरोना से मौत भी हो चुकी है. ऐसे में विभिन्न-विभिन्न संगठनों की तरफ से आवाज उठने लगी है कि वोट काउंटिंग को रुकवा दिया जाए ताकि कोई वायरस से संक्रमित ना हो और वह मौत के मुंह में जाने से बच सकें.
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय सिंह बताते हैं कि जब कोरोना वायरस अपने पैर पसार रहा था, तभी हम लोगों ने निर्वाचन आयोग से संगठन की तरफ से मांग की थी कि चुनाव को टाल दिया जाए लेकिन चुनाव आयोग ने हमारी एक भी नहीं सुनी और वह चुनाव करवाने में व्यस्त रहा और आज यह भयावह स्थिति आ गई है कि कई कर्मचारी संक्रमित होकर कोरोना से मौत के मुंह में जा चुके हैं.
उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पंचायत चुनाव के नाम पर राज्य निर्वाचन आयोग ने 71 जिलों में 577 बेसिक शिक्षकों को संक्रमित कर दिया. हम उनका नाम चुनाव आयोग को सौंप रहे हैं. इससे पहले सरकार की ओर से सभी डीएम, एसपी और जिला निर्वाचन अधिकारी को एक सर्कुलर भेजा गया था.