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UP पंचायत चुनावः PM मोदी के गोद लिए गांव में महिला ने देवर को 'सौंपी' प्रधानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए गांव जयापुर से खबर है कि महिला प्रधान के हाथों उन्हीं के देवर ने उनकी सीट छीन ली. ग्रामीणों के मुताबिक, वह चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक दबाव के चलते उन्हें मजबूरन अपना भरा हुआ नॉमिनेशन फाइल करने से पीछे हटना पड़ा.

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जयापुर में मंच पर पीएम और दुर्गावती देवी
जयापुर में मंच पर पीएम और दुर्गावती देवी

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बात यूपी में हुए पंचायत चुनाव की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का एक गांव है जयापुर. मोदी ने इसे आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया हुआ है. यहां महिला प्रधान हुआ करती थीं दुर्गावती देवी. अबकी बार गांव में महिला-पुरुष दोनों की सीट आई. दुर्गावती फिर चुनाव लड़ने वाली थीं, पर पीछे हट गईं. उनकी जगह उनके देवर नारायण सिंह पटेल ने चुनाव लड़ा और जीत भी गए. खबर है कि दुर्गावती को चुनाव न लड़ने के लिए मजबूर किया गया.

नारायण बोले- चुनाव नहीं लड़ना चाहती थी
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि दुर्गावती पर चुनाव न लड़ने के लिए पारिवारिक दबाव था. नारायण से जब इस बारे में पूछा गया तो बोले- मेरी भाभी की दिलचस्पी अब राजनीति में नहीं है. इसलिए मैंने चुनाव लड़ने का फैसला किया और घर की सीट घर में ही बनाए रखी. 56 साल के नारायण रविवार को मात्र 18 वोट से जीते. अब तक वह दुर्गावती के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे थे और प्रधानी का काम भी देख रहे थे.

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लोगों ने कहा- दुर्गावती ने नॉमिनेशन भर दिया था
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गावती चुनाव लड़ना चाहती थीं. उन्होंने नॉमिनेशन पेपर तक भर दिया था, लेकिन पारिवारिक दबाव के कारण फाइल नहीं कर पाईं. लेकिन नारायण बताते हैं कि इसके दो कारण हैं. 'एक- यह सही है कि चुनाव लड़ने में उनकी बहुत दिलचस्पी नहीं रह गई थी. दूसरा यह कि उन्हें डर था कि स्थानीय राजनीति के कुछ मुद्दों को लेकर कुछ लोग उनका विरोध करेंगे और वह पढ़ी-लिखी भी नहीं हैं. ऐसी स्थिति में उन्होंने मुझे चुनाव लड़ने को कहा.'

लेकिन दुर्गावती से नहीं हो पाई बात
अखबार ने दावा किया है कि दबाव की बात को लेकर उसने दुर्गावती से बात करने की काफी कोशिश की, लेकिन उनसे बात हो ही नहीं पाई. वैसे, इस गांव की प्रधानी 2005 से दुर्गावती के परिवार के पास ही रही है. 2005 में उनके पति और नारायण के बड़े भाई जीत नारायण 11 वोट से जीतकर प्रधान बने. लेकिन सालभर बाद ही एक हादसे में उनकी मौत हो गई. उपचुनाव में उनकी पत्नी दुर्गावती जीत गईं. 2010 में दुर्गावती को दोबारा जीत मिली.

PM भी हुए थे दुर्गा से प्रभावित
मोदी जयापुर को गोद लेने के बाद 7 नवंबर 2014 को पहली बार यहां आए थे. तब दुर्गावती ने उनके साथ मंच भी साझा किया था और पीएम ने कहा था कि वह इस महिला प्रधान से बहुत प्रभावित हुए हैं. तब दुर्गावती ने उम्मीद जताई थी कि पीएम उनके गांव का हमेशा ध्यान रखेंगे. वैसे, दुर्गावती स्कूल से ड्रॉपआउट हैं और नारायण बीएचयू से लॉ ग्रेजुएट.

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नारायण पटेल से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने बीजेपी की मदद से यह चुनाव जीता, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने इस चुनाव में उनकी कोई मदद नहीं की है. उन्होंने यह चुनाव अपने दम पर जीता है. हालांकि लोगों का कहना है कि दुर्गावती के नाम पर भी उन्हें वोट मिले होंगे.

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