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अपराधियों के पीछे लगा पुलिस का व्हाट्सएप

यूपी पुलिस स्मार्ट फोन, एप्स और सोशल साइट्स के फैलते नेटवर्क के सहारे पुलिसिंग को धार देने में लगी है. लोगों में बढ़ रहे स्मार्ट फोन के चलन को पुलिस अधिकारी शिकायत, साक्ष्य और सुराग की तलाश में इस्तेमाल कर रहे हैं.

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यूपी पुलिस स्मार्ट फोन, एप्स और सोशल साइट्स के फैलते नेटवर्क के सहारे पुलिसिंग को धार देने में लगी है. लोगों में बढ़ रहे स्मार्ट फोन के चलन को पुलिस अधिकारी शिकायत, साक्ष्य और सुराग की तलाश में इस्तेमाल कर रहे हैं.

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यूपी पुलिस ने इस मोबाइल पुलिसिंग के जरिए कई सफलता भी हासिल की हैं. लखनऊ और नोएडा के बाद सहारनपुर पुलिस ने व्हाट्स ऐप नंबर जारी किया है. जिस पर लोगों से शिकायत, सूचना, फोटो, वीडियो और सुझाव मांगे हैं.

दरअसल आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करने वाले लोगों में अपराध और अपराधियों को लेकर बढ़ रही जागरूकता को पुलिस हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहती है. वेस्ट यूपी में हाल ही में आपत्तिजनक और भडक़ाऊ विडियो, फोटोग्राफ्स के जरिए सांप्रदायिक माहौल बिगाडऩे और भ्रम की स्थिति पैदा की गई.

ऐसी स्थितियां दोबारा न पैदा हो इसके लिए सहारनपुर एसएसपी राजेश पांडेय ने सहारनपुर के लिए पुलिस का व्हाट्स ऐप नंबर (9454408999) जारी किया है, ताकि पुलिस जनता की समस्याएं सुनने और सुलझाने में तत्परता से काम कर सके. एसएसपी ने अपराध के साथ ही लोगों से पुलिसकर्मियों के अभद्र व्यवहार की क्लिप और फोटो भेजने को भी कहा है.

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लखनऊ के डीआईजी नवनीत सिकेरा ने व्हॉटस ऐप के जरिए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और काली फिल्म यूज करने वालों के खिलाफ अभियान चला रखा है. पुलिस तकनीकी सेवाएं के आईजी संदीप सालुंके ने नोएडा की महिलाओं के लिए निर्भया एट द रेट नोएडा नाम का मोबाइल ऐप बनवाया है. वेस्ट यूपी के इंस्पेक्टर विनोद सिंह सिरोही सीसीटीवी फुटेज, फोटोग्राफ्स, वीडियो और गैंग की मॉडसअपरेंडी को फेसबुक पर अपलोड कर लोगों से मदद मांगते हैं.

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