उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में 11 प्रत्याशी किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतरे हैं. नामांकन के आखिरी दिन मंगलवार को अंतिम समय में प्रकाश बजाज ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल कर निर्विरोध जीत की तरफ बढ़ रहे चुनाव की संभावना को टाल दिया है. प्रकाश बजाज के उतरने से निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों की भूमिका अहम हो गई और अब यही विधायक 10वीं राज्यसभा सीट की किस्मत का फैसला करेंगे.
बीजेपी के आठ और समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी ने एक-एक प्रत्याशी के नामांकन के बाद सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा था. लेकिन प्रकाश बजाज के नामांकन दाखिल करने के बाद राज्यसभा चुनाव का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. 10वीं सीट पर प्रकाश बजाज के निर्दलीय उतरने से निर्विरोध जीत की तरफ बढ़ रहे बसपा प्रत्याशी रामजी गौतम की राह में मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. इसी के साथ राज्यसभा चुनाव में अब राजनीतिक दलों की ओर से शह मात का खेल होने की संभावना बढ़ गई है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी 395 (कुल सदस्य संख्या-403) विधायक हैं जबकि 8 सीटें रिक्त हैं. मौजूदा बीजेपी के पास फिलहाल 306 विधायक हैं. वहीं, सपा के पास 48, बसपा के पास 18, कांग्रेस के 7, अपना दल के पास 9 और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी के चार विधायक हैं. इसके अलावा चार निर्दलीय और एक निषाद पार्टी से विधायक हैं.
यूपी विधानसभा की मौजूदा स्थिति के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए 36 विधायकों के समर्थन पर प्रथम वरियता का वोट चाहिए. इस लिहाज से बीजेपी की 8 सीटें जीतने के लिए 288 विधायकों का समर्थन चाहिए, जिसके बाद 18 विधायकों के वोट अतिरिक्त बचेगा. ऐसे ही सपा के राम गोपाल यादव के जीतने के बाद भी पार्टी के 12 वोट अतिरिक्त बचेंगे. वहीं, बसपा इस स्थिति में नहीं है कि वो अपने दम पर रामजी गौतम को राज्यसभा भेज सके.
ऐसे में प्रकाश बजाज के निर्दलीय उतरने से 10वीं राज्यसभा सीट के लिए मुकाबला काफी रोचक हो गया है. हालांकि, प्रकाश बजाज के नामांकन के दौरान उनके साथ कानपुर के सीसामऊ से सपा के विधायक हाजी इरफान सोलंकी और मैनपुरी सदर से सपा विधायक राजकुमार उर्फ राजू यादव मौजूद थे. ऐसे में माना जा रहा है कि प्रकाश बजाज को सपा का समर्थन हासिल है.
सूबे की 10वीं राज्यसभा सीट के लिए बसपा प्रत्याशी रामजी गौतम और प्रकाश बजाज के बीच चुनावी मुकाबला होगा. ऐसे में अब बीजेपी, कांग्रेस, अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पर सबकी निगाहें हैं कि ये किसके समर्थन में खड़े होंगे. स्थिति यह बन रही है कि अकेले अपने दम पर बीजेपी भी इन दोनों में से किसी एक प्रत्याशी की जीत तय नहीं कर सकती है. इसके लिए बीजेपी के साथ-साथ अपना दल (सोनेलाल) का समर्थन जुटाना होगा.
हालांकि, बीजेपी के सामने दिक्कत यह भी होगी कि खुलकर वह किसका समर्थन करे. प्रदेश में सपा और बसपा दोनों दल उसके घोर विरोधी हैं. सपा चाहकर भी निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बजाज को अपने दम पर जीत नहीं दिला सकती है. इसके लिए सपा को निर्दलियों के साथ ही अपना दल (सोनेलाल), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, कांग्रेस का पूरा सहयोग और कुछ सेंधमारी की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में अब सब कुछ छोटे दलों के फैसले पर निर्भर करेगा. ऐसे में देखना होगा कि छोटे दल और निर्दलीय विधायक किसके साथ खड़े होते हैं?