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यूपी: सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, गिरोह के सरगना समेत दो लोग गिरफ्तार

सभी आरोपियों को लखनऊ के इंदिरा नगर से गिरफ्तार किया गया है. पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है. जानकारी के मुताबिक यह गिरोह बेरोजगार युवकों को खोजकर उन्हें निशाना बनाता था.

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यूपी पुलिस को बड़ी कामयाबी (सांकेतिक फोटो)
यूपी पुलिस को बड़ी कामयाबी (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी एसटीएफ को मिली बड़ी कामयाबी
  • ठग गिरोह के सरगना समेत दो गिरफ्तार
  • सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी

उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने लखनऊ में सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है. साथ ही सरगना समेत दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है. जालसाजों के पास से बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद किए गए हैं. सभी आरोपियों को इंदिरा नगर से गिरफ्तार किया गया है. पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है. जानकारी के मुताबिक यह गिरोह बेरोजगार युवकों को खोजकर उन्हें निशाना बनाता था. गिरोह लोगों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगता था. 

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इनके पास सचिवालय का फर्जी नियुक्ति पत्र था. इसे दिखाकर वह लोगों से बाबू क्लर्क की भर्ती के लिए 4 से 5 लाख, जबकि चपरासी के लिए 2 से 3 लाख रुपये की वसूली करता था. इसके बाद ये लोग अपने अपने काम के हिसाब से पैसे आपस में बांट लेते थे. 

एसटीएफ की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक ऐसी सूचना मिली थी कि सचिवालय व अन्य सरकारी महकमों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सरगना देवेश कुमार मिश्र अपने कुछ साथियों के साथ राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर क्षेत्र स्थित अरविन्दो पार्क के पास किसी से मिलने आ रहा है. इस पर एसटीएफ की एक टीम मौके पर पहुंची और देवेश तथा उसके साथी विनीत कुमार मिश्र को गिरफ्तार कर लिया.

बयान के मुताबिक पकड़े गये ठगों के पास से फर्जी नियुक्ति पत्र और आदेश पत्र, संदिग्ध अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और फोटो, दो रजिस्टर तथा कुछ अन्य सामान बरामद किया गया है. इसमें कहा गया है कि गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि उनका गिरोह बेरोजगार नौजवानों को सचिवालय तथा अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का लालच देकर उनसे पैसे लेता है और उन्हें फर्जी तरीके से तैयार किया गया क्लर्क और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद का नियुक्ति पत्र दे देता है. 

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उन्होंने बताया कि क्लर्क पद के लिये प्रति अभ्यर्थी चार से पांच लाख रुपये और चपरासी पद के लिये दो से तीन लाख रुपये तक वसूले जाते थे. अभ्यर्थियों से मिले धन को सबके काम के हिसाब से आपस में बांट दिया जाता था. अभियुक्तों के खिलाफ इंदिरा नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की जा रही है. 

 

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