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कुलदीप सेंगर की गिरफ्तारी में देरी, भारी न पड़ जाए BJP को चुप्पी

गुरुवार को हाई कोर्ट ने फटकार लगाई तो पुलिस ने कहा कि सेंगर के खिलाफ गिरफ्तार करने लायक सबूत नहीं हैं. पर मामला जैसे ही सीबीआई के हाथ में आया गैंगरेप के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर सुबह 4.30 बजे गिरफ्तार कर लिए गए.

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आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर

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उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता एक साल से इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकर खा रही थी. सूबे में हर दिन तीन एनकाउंटर करने वाली योगी सरकार की यूपी पुलिस के हाथ आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के गिरेबान तक नहीं पहुंच पा रहे थे. गुरुवार को हाई कोर्ट ने फटकार लगाई तो पुलिस ने कहा कि सेंगर के खिलाफ गिरफ्तार करने लायक सबूत नहीं हैं. पर मामला जैसे ही सीबीआई के हाथ में आया गैंगरेप के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर सुबह 4.30 बजे गिरफ्तार कर लिए गए.

सियासी दलों का घाट-घाट का पानी पीने वाले सेंगर बीजेपी के लिए पलीता लगा गए हैं. इस मामले को लेकर योगी सरकार की जमकर फजीहत हो रही है. इसके बावजूद बीजेपी नेता खामोशी अख्तियार किए हुए हैं, कहीं ये चुप्पी मोदी-योगी के लिए भारी न पड़ जाए.

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ये है उन्नाव का केस

4 अप्रैल 2017 को उन्नाव से 15 किमी दूर माखी गांव में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण होता है. लड़की गैंगरेप का आरोप माखी गांव के ही रहने वाले बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर पर लगाती है. सत्ताधारी पार्टी से विधायक होने के चलते इस मामले में पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई के बजाय पीड़िता के पिता को ही जेल में डाल देती है. पीड़िता सीएम योगी के आवास के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश करती है. इसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में ही मौत हो जाती है. फिर भी योगी सरकार नींद से नहीं जागती.

सोती रही योगी सरकार

उन्नाव केस को लेकर विपक्ष सवाल खड़े करता है और मीडिया में खबरें आती है, तब सीएम योगी मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करते हैं. पुलिस डीजीपी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहते हैं कि विधायक सिर्फ आरोपी हैं. कोर्ट के हस्तक्षेप पर जवाब दायर करके यूपी पुलिस कहती है कि बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है. जबकि पीड़िता खुलेआम विधायक का नाम लेकर गैंगरेप का आरोप लगाती है.

बीजेपी नेता मौन

बेटी बचाव का अभियान चलाने वाली बीजेपी उन्नाव मामले को लेकर मौन है. बीजेपी नेता इस मामले पर अपनी जुबान खोलने को तैयार नहीं हैं. इतना ही नहीं बीजेपी के कई विधायक तो खुलेआम आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं. वो पीड़िता के खिलाफ ही बयान दे रहे हैं. इसी में एक विधायक सुरेंद्र सिंह हैं, जिन्होंने कहा कि तीन बच्चों की मां के साथ कहीं कोई बलात्कार करता है.

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अमित शाह की खामोशी

गुरुवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से जब इस मामले पर मीडिया ने सवाल किया तो बोले कि रोड पर बात नहीं करेंगे. जबकि बुधवार को उन्होंने लखनऊ का दौरा किया था. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर बीजेपी अध्यक्ष और पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की थी. माना जा रहा था कि वो इस मामले को पर कोई राय रखेंगे. इसके बाद भी वो उन्नाव मामले पर कोई बयान नहीं दिया है.

योगी से मिली पीड़िता, पर इंसाफ नहीं मिला

पीड़िता इंसाफ के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिली थी. इसके बावजूद पुलिस ने आरोपी विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. मामला उठा तो विधायक सेंगर सीएम योगी से मिलने पहुंचे थे. मुलाकात के बाद वो मुस्कुराते हुए निकले थे. विधायक को देखकर ऐसा संदेश गया कि सीएम से लगता है उन्हें क्लीनचिट मिल गई है. इसीलिए उनके चेहरे पर मुस्कान बिखर रही है.

बीजेपी की महिला नेता भी खामोश

सपा-बसपा सरकार के दौरान हुए बलात्कार मामले को लेकर तत्कालीन सरकारों पर सवाल खड़े करने वाले बीजेपी नेता आज मौन हैं. इतना ही नहीं नसीमुद्दीन सिद्दीकी प्रकरण को लेकर बीजेपी ने कहा था कि बेटी के सम्मान में बीजेपी मैदान में. योगी सरकार में मंत्री स्वाति सिंह भी इस मामले पर खामोश हैं. निर्भया कांड के दौरान विरोध करने बीजेपी की महिला ब्रिगेड भी शांत है. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से जब मीडिया ने गुरुवार को इस मामले पर सवाल किया तो उन्होंने अपनी जुबान नहीं खोली.

खामोशी बीजेपी को महंगी न पड़ जाए

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उन्नाव मामले पर बीजेपी पर कहीं भारी न पड़ जाए. पिछली सरकारों ने ऐसे मामलों में खामियाजा भुगत चुकी है. सपा में चाहे गायत्री प्रजापति का मामला रहा हो या फिर बसपा शासन में पुरुषोत्तम द्विवेदी का. ऐसे मामलों पर समय से कार्रवाई न होने के चलते सरकारों को फजीहत का सामना करना पड़ा था. चुनाव के दौरान उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था. उसी राह पर योगी सरकार भी चलती हुई दिख रही है. जबकि योगी सरकार से लोगों को उम्मीदें थी, लेकिन उन्नाव मामले में उनके रवैए से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. कहीं इसका खामियाजा 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना न पड़ जाए.

बीजेपी नेताओं को भी नुकसान का डर

यूपी बीजेपी प्रवक्ता दीप्ति भारद्वाज ने ट्वीट करके कहा, 'आदरणीय भाई अमित शाहजी उत्तर प्रदेश को बचा लीजिए, सरकार के निर्णय शर्मसार कर रहे हैं. ये कलंक नहीं धुलेंगे. आदरणीय भाई नरेंद्र मोदीजी और आपके साथ हम सबके सपने चूर-चूर होंगे.' उन्होंने यह भी लिखा, 'उत्तर प्रदेश में अचानक हुए घटनाक्रम दुर्भाग्यपूर्ण हैं. संगठन की 2019 की योजना पर पानी फेरने वाले हैं.'

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